Tuesday, May 20, 2014

Hindi Motivational Stories....................दुआये लें और बददुआओं से बचे !

दुआये लें और बददुआओं से बचे !

     
         बहुत पुरानी बात है एक आदिवासी गॉव में एक बनिया अनाज और किराना की दूकान चलाता था। एक दिन एक गरीब महिला ने सौ रुपये का नोट बनिये के हाथ पर रखा और साठ रुपये का सामान लिया, फिर बनिया अन्य ग्राहकों को सामान देने लगा। महिला खड़ी रही। समय बीतता जा रहा था, महिला ने बचे हुए चालीस रुपये माँगे। बनिये ने कहा - तुम्हें चालीस रुपये तो उसी समय दे दिये थे। महिला बोली - नहीं सेठ, तुमने मुझे पैसे नहीं दिये, मुझे कुछ और सामान भी लेना है, सो मुझे चालीस रुपये दे दीजिये।

      बनिये ने हर बार यही कहा कि मैंने रुपये दे दिये है, तब नौकर बोला, सेठजी, इसके चालीस रुपये देने अभी बाकी है। अब सेठ, नौकर पर बरस पड़ा - इतना ही तुझे है तो तू अपनी जेब से दे दे। यह सुन कर असहाय महिला फिर से गिड़गिड़ाई - सेठ, अभी भी मुझ गरीब के चालीस रुपये दे दे.…… वरना  महिला के ऐसे बोलने पर सेठ भड़क उठा - क्या कर लेगी, मैंने रुपये दे दिए है। सेठ, एक गरीब, लाचार की हाय ! मत लो, मैं आखिरी बार कह रही हूँ - महिला आँसू भरकर बोली लेकिन सेठ के दिल में तो लोभ था। वह बोला - क्या तुमको दुबारा चाहिए ?

      आखिर लाचार महिला का दिल जल उठा, अंतर्मन से हाय निकली - सेठ, एक माह में तुम्हारी दोनों आँखे की रोशनी चली जायेगी और आज ठीक एक वर्ष बाद तुम इस दुनिया में नहीं रहोगे। अब तो सेठ को और ही ज्यादा गुस्सा आ गया, बोला - चली जा यहाँ से, क्या तेरे कहने से ऐसा होगा ?

    मेरे साथियों लाचार की लगी हाय काम कर गयी ! ठीक पच्चीसवें दिन जब सेठ सुबह सोकर उठा तो उसे लगा कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। वह एक खम्भे से टकराकर गिर पड़ा। अब इस घटना के एक वर्ष बाद एक दिन अचानक सेठ को दौरा पड़ा और वह दुनियाँ से विदा हो गया। मात्र चालीस रुपये की लालच में गरीब की जो हाय ली उसका परिणाम कितना भयंकर निकला ? इस तरह की हाय इसी जनम में पूरी नहीं हो जाती, अगले जन्मों तक भी पीछा करती है।

सीख -  साथियो काश ! सेठ चालीस रुपये का लोभ न करता, महिला भी सुख से रहती, और सेठ भी पूरी उम्र जी लेता शान से एक छोटी सी गलती कारण कितना बड़ा भुगतान भरना पड़ा। यही पर हमको शिक्षा मिलता है की हमारे घर हम जो पैसा ले आ रहे है। वो हराम या बेईमान का तो नहीं है। चेक जरूर करे और हाय ! से बचे। हम अपने घर में नीति से, प्रेम से , प्रसन्नता से, पवित्रता से , ईमानदारी से आशीर्वाद से यदि ला रहे है तो घर में शान्ति और ख़ुशी होगी , अन्यथा नहीं।