Monday, May 26, 2014

Hindi Motivational Stories............... सत्य से बढ़कर असत्य

सत्य से बढ़कर असत्य 

     बहुत समय पहले की बात है जब राजा महाराजा अपने मंत्रियों से काफी प्रभावित रहते थे। जैसे राजा अकबर और राजा कृष्णराय और तेनालीरामा ऐसे ही एक राजा के पास मंत्री था वो कभी भी झूठ नहीं बोलता था। राजा एक दिन उस मंत्री की परीक्षा लेने की सोची। और भरे दरबार में सम्राट ने अपने हाथ के पंजे में एक पक्षी को लिया और मंत्री से पूछा - बताओ,  पक्षी जिंदा है या मृत ? मंत्री के सन्मुख यह नई तथा विचित्र परीक्षा की घड़ी थी। यदि वह कहता है कि पक्षी जिंदा है तो सम्राट पंजा दबा कर उसे मार देगा और यदि वह कहता है कि पक्षी मृत है, तो सम्राट पंजा खोलकर उसे उड़ा देगा। मंत्री के दोनों ही उत्तर झूठे ठहराये जाने की पूरी संभावना थी। आखिर मंत्री ने फैसला किया यदि मेरे एक झूठ से पक्षी के प्राण बच सकते है,  तो झूठ भी मुझे मंजूर है।

        मंत्री ने कहा - हे सम्राट,  आपके पंजे में जो पक्षी है, वह मृत है। ऐसा सुनते ही सम्राट ने पंजा खोल दिया और पक्षी उड़ गया। सम्राट  ने कहा - आज तो तुमने झूठ बोल दिया। मंत्री ने जवाब दिया - महाराज, यदि मेरे इस झूठ से इस निर्दोष पक्षी की जान बच गयी है, तो यह झूठ बोलकर भी मैं विजयी ही हूँ , हारकर भी विजयी हूँ।

       इस उत्तर से सम्राट बहुत खुश हुआ और भरे दरबार में उसकी तारीफ करने को विवश हो गया। कल्याण के लिए बोला गया झूठ, कई बार सत्य से भी बढ़कर होता है। सत्य लचीला होता है, वह व्यक्ति, समय, स्थान और परिस्थिति को परखकर निर्धारित होता है। एक व्यक्ति के सम्बन्ध में जो झूठ है, वही दूसरे के सम्बन्ध में कल्याणकारी हो सकता है।

सीख - किसी मासूम की जान बचाने ने लिए बोला गया झूठ, झूठ नहीं पर वो कल्याणकारी होता है इस लिए कहा गया सत्य से बढ़कर असत्य।