Tuesday, June 3, 2014

Hindi Motivational Stories....अहंकार

अहंकार 

   बहुत पुरानी बात है। दो मित्र पाठशाला में साथ-साथ पढ़े और बड़े हुए, पर प्रालब्ध की बात, एक तो राजा हो गया, दूसरा फ़क़ीर। राजा राजमहल में रहने लगा और फ़क़ीर गाँव-गाँव भटकने लगा। राजा अपने प्रशासन के कारण और फ़क़ीर अपनी त्याग-तपस्या के कारण विख्यात हो गये। एक बार वह फ़क़ीर राजधानी में आया, राजा को पता लगा। वह बड़ा प्रसन्न हुआ कि उसका मित्र आया है। उसने उसके स्वागत की अच्छी व्यवस्था की। महल सजाया। नगर में दीपावली करने का हुक़्म दिया। जब फ़क़ीर अपने राजा मित्र से मिलने चला, तो लोगों ने बहका दिया कि राजा बड़ा अहंकारी है। तुम्हें अपने वैभव दिखाना चाहता है। अपनी अकड़ दिखाना चाहता है। वह तुम्हें दिखाना चाहता है कि देखो, तुम क्या हो ? एक नंगे फ़क़ीर। उस फ़क़ीर ने कहा - देख लेंगे, उसकी अकड़।

   फ़क़ीर जब राजमहल के द्दार पर पहुँचा, तो राजा और उसका समस्त मत्रिमंडल फ़क़ीर के स्वागत के लिए उपस्थित हुआ। राजा ने देखा कि वर्षा के दिन तो नहीं है, फ़क़ीर के घुटनों तक कीचड़ लगी है। राजा क्या कहता, वह फ़क़ीर को लेकर अन्दर गया तो उसके सारे बहुमूल्य गद्दे-गलीचे गंदे हो गये।

  राजा को बुरा लगा, जब एकांत हुआ तब उसने फ़क़ीर से पूछा - मित्र मैं हैरान हूँ। वर्षा का तो समय नहीं रास्ते सूखे पड़े है. पर तुम्हारे पैरो पर इतनी कीचड़ कहाँ से लग गई ? तब फ़क़ीर ने उत्तर दिया - अगर तुम अपने वैभव की अकड़ दिखाना चाहते हो, तो हम भी अपनी फकीरी दिखाना चाहते है। उत्तर सुनकर राजा हँसा बोला - मित्र, आओ गले लग जाये, क्यों कि मैं कहीं पहुँचा, न तुम कहीं पहुँचे। हम दोनों वहीं के वहीं है, जहाँ पहले थे।

सीख - मित्रों इस कहानी में एक में धन की अकड़ थी, तो दूसरे में त्याग की। पर राजा के उद्दार की संभावना तो थी, फ़क़ीर की नहीं। क्यों कि जो अपनी गलती जान लेता है, ह्रदय से मान लेता है, वह सुधर सकता है।