Tuesday, June 17, 2014

Hindi Motivational Stories.................. प्रार्थना की सार्थकता

प्रार्थना की सार्थकता 

           एक प्रार्थना सभा के पश्चात् एक वकील साहब ने गाँधी जी से पूछा कि बापू आप प्रार्थना करने में इतने घंटे व्यतीत करते है, अगर इतना ही समय आपने देश की सेवा में लगाया होता तो अभी तक आपने देश की कितनी सेवा कर ली होती ? गाँधी जी अचानक गम्भीर हो गये फिर बोले - वकील साहब आप भोजन करने में कितना समय लगाते है ? वकील साहब ने कहा बीस मिनट लगाता हूँ। इस पर गाँधी जी ने कहा कि वकील साहब आप भोजन करने में इतना समय बर्बाद करते है। अगर इतना ही इस समय आप काम करते तो मुक़दमे की काफी तैयारी कर ली होती। वकील साहब ने चकित होकर कहा कि - महात्मा जी अगर मैं भोजन नहीं करूँगा तो मुक़दमे की तैयारी कैसे करूँगा ? इस पर गाँधीजी ने कहा - वकील साहब ! जिस प्रकार आप बिना भोजन के मुकदमे की तैयारी नहीं कर सकते, वैसे ही मैं भी प्रार्थना के बिना देश की सेवा नहीं कर सकता। प्रार्थना ही मेरी आत्मा का भोजन है। इस से मेरी आत्मा को शक्ति मिलती है जिस से मैं देश की सेवा करता हूँ।

      गाँधी जी की प्रार्थना सभा में जीवन दर्शन छिपा हुआ था। जैसे अन्न के थोथे छिलकों से शरीर को पुष्ट नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार सारहीन लालसाएँ आत्मा को स्वस्थ नहीं कर सकती। यदि शरीर को समय पर भोजन न दिया तो वह दुर्बल हो जाता है और भूखा प्यास से व्याकुल हो कर रोटी पानी के लिए तड़पने लगता है। यही बात आत्मा पर भी लागू होती है। इसे एकान्त में प्रार्थना करने की आवश्यकता होती है। इस से सार्थक बल मिलता है।

सीख - इस कहानी से हमें ये समझ मिलती है की जिस भी कार्य को करना है  उसके लिए पहले शक्ति धारण करो फिर कार्य में लग जाओ तो वह कार्य सफल होगा।