Thursday, June 12, 2014

Hindi Motivational Stories..... नर्क का विज्ञापन

नर्क का विज्ञापन 

   यह तो हम सब जानते है की मरने के बाद धर्मराज के सामने पेशी होती है। व लोगो के नर्क व स्वर्ग में जाने का फैसला होता है। एक बार ऐसा हुआ कि धर्मराज ने रिश्वत लेनी शुरू कर दी, उसके इस कार्य से हाहाकार मच गया। मृत्युलोक के वासियों ने शिष्टमण्डल भगवान के पास भेजा, उस पर भगवान ने कहा कि यदि मैंने धर्मराज की जगह किसी और को रख लिया तो वह भी जरूर रिश्वत लेगा। तो पृथ्वी निवासियों ने सुझाव दिया कि आप वोट डालने की तरीका अपना ले। एक दिन में जितने लोग यहाँ धर्मराज पूरी में आयेंगे वे सब एक-दूसरे के लिए वोट डालेंगे कि कौन नर्क में जायेगा और कौन स्वर्ग में, आखिर इस प्रणाली को अपना लिया गया।

  इसी बीच एक नेता जी मर कर धर्मराज के पास पहुँचे। वे सादा अपनी राजनीती में मस्त रहते थे। उन्हें नर्क और स्वर्ग के बारे में कुछ पता नहीं था। उन्होंने वोट डलवाने से पहले कहा मुझे नर्क और स्वर्ग दिखाया जाये, जो स्थान मुझे पसन्द आयेगा मैं वहाँ जाने के लिए अपना चुनाव स्वीकार करूँगा। चुनाव अधिकारी सहमत हो गया, उसने एक विमान मंगवाया और नेता जी को स्वर्ग की ओर ले गया। स्वर्ग का दरवाजा खोलकर नेता जी ने अन्दर झाँका तो देखा कि 15 -20 महात्मा लोग हाथ में माला लिए भगवान का नाम ले रहे है। मौसम बड़ा सुहावना है शांति का वातावरण बना हुआ है। कोई एक - दूसरे से बातचीत नहीं कर रहा है। नेताजी को यह अच्छा नहीं लगा, उन्होंने मुँह बनाकर अधिकारी को नर्क दिखाने को कहा।

  जब नेता जी ने नर्क का दरवाजा खोला तो देखा जगह-जगह लोग शराब पी रहे है, मौज उड़ा रहे है। सब लोग मस्त है और खूब रौनक लगी हुई है। नेता जी को नर्क पसन्द आया और वापस आकर वे अपने प्रचार में लग गये और कहने लगे कि मुझे नर्क में जाने के लिए वोट दीजिये। फिर क्या था नेता जी को नर्क के लिए वोट डाले और नेता जी को नर्क भेज दिया गया।

  वहाँ जाकर उन्होंने शरब पीया, खूब नाचें और जब वे थक गए तो उन्होंने नर्क के इन्क्वायरी ऑफिस में आराम करने की जगह पूछी तो नेताजी को सीधा चलने को कहा गया और उनकी आँखों पर पट्टी बाँध दी गई। सीधा चलते हुए, नेताजी बड़े जोर से एक गहरी खाई में गिर पड़े। गिरते ही उनकी बुरी तरह पिटाई होने लगी। नेताजी ने कहा यह कौन सी जगह है जो मुझे पीट रहे हो ? जवाब मिला कि यह नर्क है। नेता ने कहा यह नर्क कैसे हो सकता है। नर्क से तो मैं आ ही रहा हूँ। वहाँ तो बहुत खुशियाँ तथा खाने-पीने की चीज़ है। तो पीटते-पीटते एक बोला, वह तो हमारा नर्क का विज्ञापन डिपार्टमेंट है। यदि हम ऐसी विज्ञापन न करे तो हमारे नर्क में आयेगा ही कौन ? वास्तविक नर्क तो यह है।

सीख - स्वर्ग और नर्क की जानकारी हम सब को रखनी है। अल्प काल के सुख की लालसा में हम स्वर्ग के सच्चे सुख से कही वंचित न हो जाये।