Sunday, June 8, 2014

Hindi Motivational Stories..... श्रेष्ठ विचार ही विजय बनाते है

श्रेष्ठ विचार ही विजय बनाते है 

    भारत के एक नगर में एक बुद्धिमान राजा राज्य करता था। वह कोई भी कार्य करता, उसको भली-भाँति सोच-समझ कर उस कर्म का परिणाम को देख कर ही करता। उसकी निर्णय शक्ति परख शक्ति बहुत प्रबल थी। राज्य के बहुत से लोग उसके पास अपनी घरेलु समस्याएं लेकर आते और समाधान होकर जाते थे। इस प्रकार पुरे नगर में वह प्रसिद्ध हो गया था।

 समय बदलता गया दिन महीने साल गुजरते गए और राजा बहुत बूढ़ा हो गया। परन्तु उसकी बुद्धि क्षीण नहीं हुई। राजा के तीन पुत्र थे। तीनों में रात-दिन का अन्तर था। बूढ़े राजा के सामने एक प्रश्न खड़ा था। वह सोचता था की मरने के पहले ही इन सब को अपना-अपना भार सौप दूँ। परन्तु किसको उत्तराधिकारी बनाया जाये। वह तीनों में से किसी को नाराज भी नहीं करना चाहता था और बुद्धिहीन बेटे को राज्य-अधिकारी भी नहीं बनाना चाहता था।

  विचार करने पर एक युक्ति सूझी। उसने तीनो बेटों को पास बुलाया और कहा - देखो, मैं बूढ़ा हो गया हूँ। इस दुनिया में चन्द ही रोज का मेहमान हूँ। इस संसार से जाने से पहले मैं चाहता हूँ की आप तीनों में से एक को राज्याधिकारी बना दिया जाये। मैं बुद्धिमता, समझ और सूझ-बुझ के हिसाब से ही यह निर्णय करना चाहता हूँ। और राजा ने तीनो को सौ-सौ रुपये दिए और कहा कि - घर के पिछले भाग में तीन बड़े-बड़े कमरे है खाली पड़े है, आप तीनों को उन कमरों को इन रुपयों से लाये गए सामान से भरना है। जिसका ढंग सब से अच्छा होगा, उसी को राज्याधिकारी नियुक्त किया जायेगा। एक सप्ताह का समय है आप लोगो के पास सोच-विचार समझ से कार्य करो। तीनो पुत्रों ने हामी भरी और रुपये लेकर अपने-अपने कमरे में चले गए।

   समय पूरा होते ही राजा अपने बेटों को लेकर कमरे देखने गया तो सब से पहले बड़े बेटा का कमरा देखा और उसने कमरा तो भर दिया था परन्तु सारी गला-सड़ा सामान था जो बदबू दे रहा था। और फिर दूसरे बेटा का कमरा देखा तो पहले वाले से अच्छा था गाय भैंस के चारा से पूरा कमरा भर रखा था। उस के बाद तीसरे बेटे का कमरा देखा कमरा पूरा खाली था परन्तु कमरा बहुत ही साफ़-सुन्दर था और अन्दर चारो तरफ चार दीपक जला रखे थे और अगरबत्ती की खुशबु से पूरा कमरा महाक रहा था।

 राजा ने दोनों बेटों को कहा अब आप ही बताये की राज्याधिकारी किसे बनना चाहिये तो दोनों भाईयो ने छोटे भाई की तरह इशारा किया और राजा ने उसे ही राज्याधिकारी बना दिया।

 अपनी बुद्धिमता के कारण ही छोटे भाई ने विजय प्राप्त की है। ये कहते हुए राजा ने घर की चाबियाँ छोटे बेटे के हाथ में सौप दी और कहा - बस, अब तुम संभालो। मैं अपना अन्तिम समय प्रभु-भजन में व्यतीत करूँगा।

सीख - अच्छे विचार ही मनुष्य को श्रेष्ठ और विजय बनाते है। इस लिए शुभ संकल्प करते चलो और विजय की रह पर चलते रहो।