Tuesday, October 13, 2015

Meditation Thoughts For Navratri.....Festival


मैं शिव स्वरूपा माँ दुर्गा पूजनीय आत्मा हूँ। 

हम सब ये जानते  है कि नवरात्री में देवियों की पूजा होती है। देवियों को शक्ति के रूप में याद किया जाता है।   उनके जीवन की गाथा में ये बताया जाता है की जब पूरी सृष्टि पर असुरों का  राज्य था . तब माँ दुर्गा ने परमात्मा शिव से शक्ति प्राप्त कर असुरों का नश किया था।  उसी का यादगार नवरात्री का ये उत्सव मनाया जाता है। और आज भी पूरी सृष्टि पर असुरों का राज्य है उनका नश करने के लिये एक दैवी दुनिया पुनः स्थापना करने के लिए परमात्मा शिव इस धरा पर अवतरित होकर हमें शक्ति दे रहे है। और संपूर्ण संसार अभी देवियों का आवाहन कर रहा है।  तो ये वाही समय है हम सब को अपने आत्मिक स्वरुप में बैठकर परमात्मा से शक्ति लेकर असुरों नश करना है। तो चलिये। … इस रूहानी यात्रा पर।

 

अपन को संसार की बातों से अलग कर स्वम् को आत्मा निश्चय कर। ………मन और बुद्धि के संकल्प द्वारा परमधाम की ओर उड़ान भरें। …

मैं आत्मा इस आवाज़ की दुनियाँ से दूर सूरज, चाँद , सितारों से पार पहुँच गयी हूँ। … जहाँ बहुत शान्ति है चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश है। इस प्रकाशमय अलोक में प्यारे बापदादा मेरा स्वागत कर रहे है। मैं आत्मा बापदादा की गोद में पहुँच गयी हूँ। बापदादा का स्नेह मुझ आत्मा को तृप्त कर दिया है। मैं आत्मा अतीन्द्रिय सुख में खो गयी हूँ। ................... 

बापदादा के साथ मैं आत्मा एक ओर उड़ान भरते हुवे परमधाम में पहुंच गयी हूँ जहाँ न आवाज़ है न संकल्प बस  डेड साइलेंस है। ……………… मेरी आत्मा परमधाम में परमात्मा के मिलन में डूब गयी है। 

बिन्दु रूप अवस्था में खो गयी है। बीज रूप में ठीक गयी है। ...................... 

परम शान्ति में खो गयी है। ............. शान्ति , शान्ति और शान्ति।      ( कुछ देर इसी अवस्था में रहे )

अब मुझ आत्मा को सच्ची शान्ति का एहसास हो चूका है। शान्ति में ही सब कुछ है। शान्ति ही शक्ति का आधार है।  शान्ति नहीं तो कुछ भी नहीं , शान्ति से ही हर कार्य की सुरवात होती है। शान्ति ही शुभ है शान्ति ही विधि है शान्ति से सिद्धि मिलती है। इस लिए कहा है, ओम में सब कुछ है। याने ओम माना आत्मा और आत्मा का स्वधर्म है शान्ति इसलिए स्वधर्म में सुख है। 

मैं आत्मा अब धीरे धीरे परमधाम से निकल कर शांति की शक्ति से सम्प्पन में शुक्ष्म लोक में आ गयी हूँ यहाँ में और बापदादा दोनों कम्बाइन है में आत्मा शिव शक्ति बन गयी हूँ।  मुझे याद आ रहा है कल्प पहले भी में ऐसे ही शिवशक्ति बन विश्व कल्याण के कार्य में सहयोगी बनी थी।
बाबा मेरे सामने एक दृश्य इमर्ज कर रहे है और में आत्मा उस में सहयोगी बनती जा रही हूँ।  शुक्ष्म लोक में एक बहुत बड़ा ग्लोब है और उसमें रहने वाली सभी आत्माएं विकारों के जेल में पड़े हुवे है। दुखी अशांति और दर्द से पीड़ित है। ये सब देखकर में आत्मा बाबा के ईशारे को समझ गयी और बाबा के साथ मिलकर अपने पवित्र स्वरुप में टिक गयी।  और में शिवशक्ति बन गयी।  मैं शिव स्वरूपा माँ दुर्गा बन गयी और बापदादा से मिलकर सम्पूर्ण ग्लोब को लाल और नीले रंग की किरनो की वर्षा उन आत्माओ को और सृष्टि को देने लगी। ……
इस अवशता में कुछ पल को जाइए इस दृश्य को देखते रहिये बापदादा और आप कम्बाइन है शिवशक्ति बन विश्व की सबी दुखी आत्माओं को विकारो की जेल से मुक्त कर रहे है। उन्हें मुक्ति और जीवन मुक्ति का वर्षा दे रहे हो....
अब धीरे धीरे बापदादा से मिलान मानते हुवे दृष्टी लेते हुवे मैं शिव स्वरूपा माँ दुर्गा की इसी स्वमान को याद करते हुवे आप नीचे की ओर आ रहे है। और अपने शरीर में प्रवेश कर रहे हो।

मैं हर कार्य शान्ति में रहकर करुँगी ………अपने स्वधर्म को याद करते हुवे कर्म करुँगी। …आज पुरे दिन में बीच बीच में मैं शिव स्वरूपा माँ दुर्गा हूँ इस स्वमान का भी अभ्यास करते रहूंगी। …

                                                                …ओम शान्ति शान्ति  शान्ति