Tuesday, July 15, 2014

Hindi Motivational Stories........................राजा मानिचन्द्र की उदारता

राजा मानिचन्द्र की उदारता 

         बंगाल में गुष्करा  एक छोटा-सा स्टेशन है। एक दिन रेलगाड़ी आकर स्टेशन पर खड़ी हुई। उतरनेवाले झटपट उतरने लगे और चढ़ने वाले दौड़-दौड़कर गाड़ी में चढ़ने लगे। एक बुढ़िया भी गाड़ी से उतरी। उसने अपनी गठरी खिसकाकर डिब्बे के दरवाजे पर तो कर ली थी, किन्तु बहुत चेष्टा करके भी उठा नहीं पायी थी। कई लोग गठरी को लाँघते हुए डिब्बे में चढ़े और डिब्बे से उतरे। बुड़ियाने कई लोगोँ से बड़ी दीनता से प्रार्थना की कि उसकी गठरी उसके सिर पर उठाकर रख दे। किन्तु किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। लोग ऐसे चले जाते थे, जैसे बहिरे हो। गाड़ी छूटने का समय हो गया। बेचारी बुढ़िया इधर-उधर बड़ी व्याकुलता से देखने लगी। उसकी आँखों से टप-टप आँसू गिरने लगे।

      उसी समय एकाएक प्रथम श्रेणी के डिब्बे में बैठे एक सज्जन की दॄष्टि बुढ़िया पर पड़ी। गाड़ी छूटने की घंटी बज चुकी थी। किन्तु उन्होंने इसकी परवा नहीं की। अपने डिब्बे से वे शीघ्रता से उतरे और बुढ़िया की गठरी उठाकर उन्होंने उस के सिर पर रख दी। वहाँ से बड़ी शीघ्रता से अपने डिब्बे में जाकर जैसे ही वे बैठे, गाड़ी चल पड़ी। बुढ़िया सिर पर गठरी लिये उन्हें आशीर्वाद दे रही थी -" बेटा ! भगवान तेरा भला करें। "

     आप जानते हो कि बुढ़िया की गठरी उठा देनेवाले सज्जन कौन थे ? वे थे कासिम बाजार के राजा मानिचन्द्र नन्द, जो उस गाड़ी से कलकत्ते जा रहे थे। सचमुच वे राजा थे, क्यों कि सच्चा राजा वह नहीं है जो धनी है या बड़ी सेना रखता है। राजा वह है जो समय पर प्रजा की मदत करे।

सीख -  सच्चा राजा वह है, जिसका हृदय उदार है, जो दीन-दुःखियों और दुर्बलों की सहायता कर सकता है ? ऐसे सच्चे राजा बनने का आप सब हम सब का अधिकार है। तुम्हे इसके लिये प्रयत्न करना चाहिये। मुम्बई, कलकत्ता, गुजरात ऐसे  … बहुत से शहरों में जहाँ रेलगाड़ी चलती है। वहाँ ऐसे बहुत उदहारण आज भी देखने को मिलते है।