मरकर आदमी कहा जाता है।
एक बार एक पण्डित काशी से पढ़ाई पूरी कर अपने शहर आया और जैसे ही स्टेशन से उतर कर अपने घर के लिए रिक्शा करना चाहा पर उस दिन शहर में कुछ हड़ताल के कारण रिक्शा नहीं मिलीं तो पण्डितजी अपने पोती पुस्तक लेकर चल पड़े पैदल और रस्ते में एक जनाजा निकल रहा था तो पास के एक घर के यहाँ बाहर खड़े हो गए। उस घर के ऊपर एक वेश्या रहती थी उसने एक लड़की से कहा पता करो ये आदमी नरक गया है या स्वर्ग ? लड़की गयी और कुछ समय के बाद वापस आई और कहा ये तो नरक में गया।
पण्डितजी सोचने लगे कि ऐसी कौन सी विद्य है जिस से ये पता चलता है कि आदमी मरने के बाद नरक में या स्वर्ग में गया है? जरूर वेश्या के पास कोई अनोखी विद्या है जिसे समझना होगा। पण्डित जी ये सोच ही रहे थे, कि एक और मुर्दा वहाँ से निकला तब फिर वेश्या ने लड़की से फिर कहाँ पता करके आओ ये कहाँ गया है ? लड़की गयी और कुछ देर बाद आई और कहा कि ये तो स्वर्ग गया। ....
पण्डित जी से रह न गया वे तुरंत सीढ़ियों से ऊपर गये और वेश्या ने उसे देखते ही समझ गयी की ये अपना कोई ग्राहक नहीं है। पण्डित जाते ही कहा 'नमस्ते बहन जी' वेश्या बोली 'में बहनजी नहीं हूँ में तो वेश्या हूँ ' पण्डित बोला 'हमारे लिए तो आप सब माँ बहन ही हो।' वेश्या बोली 'अच्छा बोलो क्या काम है।' पण्डित ने कहा 'आपके पास कौन सी विद्य है जिस से ये पता चलता है कि मरने के बाद आदमी कहा जाता है ? ' तब वेश्या ने उस लड़की को बुलाया और कहा इन्हें बताउ कि अपने कैसे परिक्षण किया।
लड़की ने कहा पहले जो मुर्दा गया उसके जनाजे में शामिल लोगो से उनका घर का पता मालूम किया और उनके घर गयी तो वे बहुत रो रहे थे पर उसमें दुःख का भाव कम था और वहाँ के लोगो से पूछा कि ये आदमी कैसा था? मोहल्ले वालों ने कहा हम तो निहाल हो गये। 'वह तो रोज गाली देता था और आये दिन कोई न कोई हंगामा करता था।' तो मैं समझ गयी कि ये व्यक्ति नरक में गया है।
और दूसरे के घर गयी तो वहाँ बहुत लोग एक घर में बैठे रो रहे थे। में समझ गयी कि ये वही घर है और फिर उनसे पता किया तो मालूम हुआ की वो सब का बहुत प्यारा था। और मोहल्ले वालो से पूछा तो वे कहने लगे हम तो अनाथ हो गये। हमारा मशीहा चला गया ! कहकर वो भी रो पड़े। तो मैं समझ गयी की ये आदमी स्वर्ग में गया है। पण्डित जी ये बाते सुनकर बोले ये बातें तो हमें पढ़ाया गया था पर मेरे दिमाग में आया ही नहीं। और लड़की को धन्यावाद देकर पण्डित जी अपने घर चल दिये।
सीख - पढ़ाई करने के बाद भी वो बातें हमारे जीवन में समय पर याद नहीं आते क्यों कि चिन्तन का अभाव है। पढ़ाई के बाद हम अपने कारोबार और व्यर्थ चिन्तन में रहते है जिस के कारण मुलभुत चीजे खो देते है। इस लिए सदा चिंतन मनन करते रहो।