Wednesday, July 29, 2026

बोलो और सफल बनो: प्रभावशाली संवाद की सम्पूर्ण कला

 https://www.amazon.in/dp/B0HBR35QGF



क्या आप अपनी बात कहने से डरते हैं? क्या आप चाहते हैं कि लोग आपकी बात ध्यान से सुनें? यह पुस्तक आपकी आवाज़ को आपकी सबसे बड़ी ताकत बनाएगी!

15 वर्षों के अनुभवी RJ आर.जे. रमेश ने इस पुस्तक में संवाद की वह कला सिखाई है, जिसने लाखों श्रोताओं को प्रभावित किया। यह पुस्तक केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि व्यावहारिक तकनीकें, रोज़ाना अभ्यास और RJ की दुनिया के रोचक अनुभवों पर आधारित है।

इस पुस्तक में सीखें:

  •  — आवाज़ की पिच, टोन, टेम्पो और साँस नियंत्रण
  •  — स्टेज फियर को ऊर्जा में कैसे बदलें
  •  — बोलने की रीढ़ कैसे मजबूत करें
  •  — क्या बोलें और क्या नहीं, स्टोरीटेलिंग की कला
  •  — बिना बोले भी प्रभावी कैसे बनें
  •  — मंच पर आत्मविश्वास से कैसे बोलें
  •  — विवाद, आलोचना, संघर्ष को कैसे संभालें
  •  — अपनी अनोखी शैली कैसे बनाएँ

10 अध्याय, 35,000+ शब्द, 30-दिन की अभ्यास चुनौती, और 50+ आवाज़ व्यायाम — यह पुस्तक आपको हर दिन अभ्यास करने, आत्म-मूल्यांकन करने और निरंतर सुधार करने के लिए प्रेरित करेगी।

यह पुस्तक किसके लिए है?

  • भावी RJ और एंकर
  • प्रोफेशनल्स जो कम्युनिकेशन स्किल्स सुधारना चाहते हैं
  • विद्यार्थी जो प्रस्तुति और वक्तृत्व कला में निपुण होना चाहते हैं
  • हर वह व्यक्ति जो अपनी बात को प्रभावी ढंग से कहना चाहता है

"बोलो और सफल बनो — यह सिर्फ किताब का नाम नहीं, यह आपकी ज़िन्दगी का मंत्र है। बोलिए, और दुनिया आपकी होगी।"

आज ही अपनी आवाज़ खोजें और सफलता की नई ऊँचाइयाँ छुएँ!


संवाद — मानवता की पहली भाषा

मानव सभ्यता की शुरुआत एक आवाज़ से हुई। जब पहले मानव ने दूसरे से कुछ कहा — शायद खतरे का संकेत दिया, शायद खाना बाँटने के लिए कहा, या शायद प्यार जताया — उसी पल संवाद का जन्म हुआ। और तभी से, जो बेहतर बोलता था, वही आगे निकलता था — जंगल में भी, और आज के कॉर्पोरेट जंगल में भी।

यह कोई संयोग नहीं कि आज दुनिया के सबसे सफल लोग — चाहे वे राजनीतिज्ञ हों, उद्योगपति हों, कलाकार हों, या शिक्षक — सभी में एक बात समान है: वे अपनी बात कहना जानते हैं। वे अपनी आवाज़ का उपयोग करना जानते हैं। वे अपने शब्दों को हथियार की तरह, औज़ार की तरह, और दोस्त की तरह इस्तेमाल करना जानते हैं।

यह पुस्तक क्यों?

मैंने अपने करियर में हजारों लोगों को देखा है — कुछ बहुत प्रतिभाशाली थे, लेकिन वे अपनी बात नहीं कह पाते थे। उनके पास ज्ञान था, विचार थे, नवाचार थे, लेकिन वे उन्हें प्रस्तुत नहीं कर पाते थे। और दूसरी तरफ, कुछ लोग इतनी अच्छी तरह बोलते थे कि उनके पास ज्ञान कम था, फिर भी लोग उन्हें सुनते थे, मानते थे, और उनका अनुसरण करते थे।

यह अनुभूति कि "बोलने की कला" जीवन में सफलता का एक प्रमुख कारण है, इस पुस्तक का जन्म हुआ। मैं चाहता था कि लोग यह समझें कि बोलना कोई जन्मजात प्रतिभा नहीं, बल्कि एक कला है जो सीखी जा सकती है।

इस पुस्तक में क्या है?

इस पुस्तक को 10 अध्यायों में विभाजित किया गया है, हर अध्याय एक महत्वपूर्ण पहलू को कवर करता है:

अध्याय 1: आवाज़ — आपकी पहली पहचान — कैसे आपकी आवाज़ आपके बारे में सब कुछ बताती है और कैसे इसे निखारें।

अध्याय 2: डर पर विजय — स्टेज फियर को कैसे हराएँ — मंच का डर एक प्राकृतिक चीज़ है, लेकिन इसे काबू में कैसे करें।

अध्याय 3: आत्मविश्वास — बोलने की रीढ़ — आत्मविश्वास कहाँ से आता है और इसे कैसे बढ़ाएँ।

अध्याय 4: शब्दों का चयन — क्या बोलें और क्या नहीं — हर स्थिति के लिए सही शब्दों का चुनाव कैसे करें।

अध्याय 5: शारीरिक भाषा — बिना बोले भी बोलना — आपकी बॉडी लैंग्वेज आपके शब्दों से अधिक कहती है।

अध्याय 6: एक RJ की दुनिया — माइक से जुड़ाव — रेडियो की दुनिया से सीखें कि कैसे दूर बैठे लोगों से जुड़ें।

अध्याय 7: सार्वजनिक भाषण की कला — मंच पर कैसे प्रभावशाली हों।

अध्याय 8: कठिन परिस्थितियों में संवाद — जब बात करना मुश्किल हो, तब क्या करें।

अध्याय 9: अपनी Signature Style बनाएँ — कैसे दूसरों से अलग पहचान बनाएँ।

अध्याय 10: बोलते रहिए, बढ़ते रहिए — निरंतर अभ्यास की यात्रा और भविष्य की राह।

यह पुस्तक किसने लिखी?

मैं, आर.जे. रमेश, पिछले 15 वर्षों से रेडियो की दुनिया में हूँ। मैंने कई स्टेशनों पर काम किया है, हजारों श्रोताओं से बात की है, और हर दिन कुछ नया सीखा है। यह पुस्तक मेरे अनुभवों का संग्रह है — मेरी सफलताओं और असफलताओं दोनों से सीखे गए पाठ।

कैसे पढ़ें यह पुस्तक?

मैं आपको सलाह देता हूँ कि इस पुस्तक को एक ही बार में न पढ़ें। हर अध्याय को पढ़ें, फिर उसे आत्मसात करें, उस पर मनन करें, और फिर अगले अध्याय पर जाएँ। हर अध्याय के अंत में दिए गए अभ्यासों को ज़रूर करें। क्योंकि यह पुस्तक केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीने के लिए है।

और हाँ — इस पुस्तक को पढ़ते समय ज़ोर से पढ़ें। अपनी आवाज़ सुनें। खुद को सुनें। यही इस पुस्तक का पहला अभ्यास है।


"हर महान वक्ता कभी एक शुरुआत करने वाला था। आज आपकी बारी है।"

— आर.जे. रमेश


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Monday, February 16, 2026

शीर्षक –हमारे गांव का पीपल

 


हमारे गांव का पीपल दो भाइयों में बट गया है।

वहीं पर एक कुआं था वह कुआं भी बट गया है।

गांव सुंदर बहुत था एक सुंदर सा नजारा था 

इसी पीपल के नीचे बैठकर कुछ पल गुजरा था।

वही एक बैठका का था गांव का सब लोग आते थे।

सयाने हो युवा बच्चे सभी कुछ पल बिताते थे।

समय की बात है अब वो पीपल कट गया है।

पता चला दो भाइयों में बट गया है।

नजर जब कुएं पर गई तो देखा कुआं भी पट गया है।

कुछ लोगों ने बताया दो भाइयों में बट गया है।

कुआं और पीपल जब से हट गया है।

वहां न कोई आता है ना जाता है सिर्फ सन्नाटा है।

कुआं और पेड़ एक प्रकृति है इसे न बाटो।

न पेड़ को काटो न कुआं को पाटो। 

यह दृश्य देखकर हमारे मन में कुछ खटक गया है।

हमारे गांव का पीपल दो भाइयों में बट गया है।


*ओम शांति** 

रचनाकार *–सुरेश चंद्र केशरवानी* 

(प्रयागराज शंकरगढ़)

मोबाइल नंबर –9919245170

Thursday, January 29, 2026

*शीर्षक –तालाब में अब पानी नहीं है।*



1– तैरने आता है मगर तालाब में पानी नहीं है।

ननिहाल में अब वो प्यार नहीं मिलता क्योंकि नानी नहीं है।

किसी भी बाग में अब वो रौनक नहीं मिलती।

क्योंकि अब वह निगरानी नहीं है।

मैं आज भी उसी उमंग उत्साह से उड़ना चाहता हूं।

मगर अब वह रवानी नहीं है।

तैरना आता है मगर तालाब में पानी नहीं है।


2–ये इंसा बहुत दूर तक सोचता है।

मगर सोंच की कुछ निशानी नहीं है।

परिंदे के जैसे लौट आओ घर को

यहां कोई अपनी कहानी नहीं है।

ज्यादा उड़ोगे तो कट जाएंगे पर

ऊपर वाले की मेहरबानी नहीं है।

रहो नम्र इतना की पहचान आओ

यह रिश्ता कोई खानदानी नहीं है।

तैरना आता है मगर तालाब में अब पानी नहीं है ।


3–ज्यादा कहूंगा तो तुम ही खाओगे।

बहुत बोलता है जुबानी नहीं है।

ऊपर देखता हूं धुआं ही धुआं है।

गगन भी अब वो आसमानी नहीं है।

थे जितने कुएं गांव में जाकर देखो

किसी में अब पीने का पानी नहीं है।

चमक और दमक कुछ ही पल की है बाबू

यह रिश्ता कोई अब रूहानी नहीं है।

तैरना आता है मगर तालाब में पानी नहीं है।

ननिहाल में अब वह प्यार नहीं मिलता क्योंकि अपनी नानी नहीं है।


*ओम शांति** 

रचनाकार *–सुरेश चंद्र केशरवानी* 

(प्रयागराज शंकरगढ़)

मोबाइल नंबर –9919245170

Sunday, December 28, 2025

किसान : एक सम्मानजनक, स्थायी और भविष्य–निर्माता करियर



भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की लगभग 55–60% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। फिर भी, लंबे समय तक “किसान” को केवल परंपरागत पेशे के रूप में देखा गया, करियर के रूप में नहीं। आज समय बदल चुका है। आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाएँ, जैविक खेती, एग्री–बिज़नेस और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने किसान को एक सफल उद्यमी (Agri-Entrepreneur) बना दिया है।

किसान का करियर केवल खेती करना नहीं, बल्कि धरती, विज्ञान, प्रबंधन और समाज सेवा का सुंदर संगम है।


किसान कौन है? (Who is a Farmer)

किसान वह व्यक्ति है जो भूमि, जल, बीज और परिश्रम से अन्न, फल, सब्ज़ी, तिलहन, दलहन, कपास, गन्ना, मसाले आदि का उत्पादन करता है। लेकिन आधुनिक संदर्भ में किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि

  • योजनाकार

  • वैज्ञानिक सोच वाला प्रयोगकर्ता

  • बाज़ार समझने वाला व्यापारी

  • पर्यावरण रक्षक
    भी है।


किसान करियर का महत्व

  1. देश की खाद्य सुरक्षा
    किसान के बिना देश भूखा रह सकता है। अन्नदाता का योगदान अमूल्य है।

  2. स्वरोज़गार और आत्मनिर्भरता
    खेती में स्वयं का व्यवसाय होता है, कोई बॉस नहीं।

  3. स्थायी आय के अवसर
    फसल, पशुपालन, डेयरी, मधुमक्खी पालन, मशरूम, मत्स्य पालन से बहु–आय संभव है।

  4. प्रकृति के साथ जुड़ाव
    मिट्टी, मौसम और मौसम चक्र को समझने का अवसर।


किसान बनने के लिए आवश्यक योग्यता

  • शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं, लेकिन

    • 10वीं/12वीं

    • कृषि डिप्लोमा

    • B.Sc. Agriculture

    • Organic Farming, Agri-Tech Courses
      फायदेमंद होते हैं।

  • मुख्य कौशल (Skills)

    • धैर्य और मेहनत

    • जोखिम उठाने की क्षमता

    • नई तकनीक सीखने की इच्छा

    • बाज़ार और लागत का ज्ञान


आधुनिक किसान के नए क्षेत्र (Career Options in Farming)

1. जैविक खेती (Organic Farming)

रासायनिक खाद से मुक्त खेती। बाज़ार में दाम अधिक, स्वास्थ्य के लिए बेहतर।

2. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग

कंपनियों के साथ समझौता करके निश्चित आय।

3. ग्रीनहाउस और पॉलीहाउस खेती

कम ज़मीन में अधिक उत्पादन – फूल, सब्ज़ी, विदेशी फसलें।

4. डेयरी और पशुपालन

दूध, घी, पनीर, गोबर गैस – नियमित आय।

5. एग्री–स्टार्टअप

ड्रोन, ऐप, मिट्टी परीक्षण, फसल सलाह, फार्म टू मार्केट मॉडल।


सरकारी योजनाएँ (Support System)

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि

  • किसान क्रेडिट कार्ड

  • फसल बीमा योजना

  • सब्सिडी – ड्रिप इरिगेशन, सोलर पंप

  • कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)

ये योजनाएँ किसान करियर को सुरक्षित और लाभकारी बनाती हैं।


सफलता की कहानी – 1

श्री सुभाष पालेकर (Zero Budget Natural Farming)

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में किसान आत्महत्याओं की समस्या गंभीर थी। श्री सुभाष पालेकर स्वयं एक साधारण किसान परिवार से थे। उन्होंने देखा कि रासायनिक खेती से लागत बढ़ती जा रही है और लाभ घटता जा रहा है।

उन्होंने शून्य बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) की अवधारणा विकसित की –

  • देशी गाय

  • जीवामृत

  • बीजामृत

  • बिना रासायनिक खाद

परिणाम यह हुआ कि हजारों किसानों की लागत शून्य के पास आ गई और मुनाफा बढ़ा। आज देश–विदेश में उनके विचार अपनाए जा रहे हैं।
👉 यह कहानी बताती है कि किसान केवल खेत में नहीं, विचारों से भी क्रांति ला सकता है।


सफलता की कहानी – 2

नम्मालवार (तमिलनाडु के गांधी)

नम्मालवार एक साधारण किसान और पर्यावरण कार्यकर्ता थे। उन्होंने जीवन भर प्राकृतिक खेती का प्रचार किया। न पुरस्कारों की चाह, न धन की लालसा।

उन्होंने कहा –
“धरती माँ का शोषण नहीं, संरक्षण करो।”

आज तमिलनाडु के हज़ारों किसान उनकी शिक्षा से प्रेरित होकर जैविक खेती कर रहे हैं और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
👉 यह कहानी सिखाती है कि किसान का करियर सेवा और संतुलन भी सिखाता है।


किसान करियर की चुनौतियाँ

  • मौसम की अनिश्चितता

  • बाज़ार भाव में उतार–चढ़ाव

  • प्रारंभिक पूंजी

  • सही जानकारी का अभाव

लेकिन ज्ञान, तकनीक और सहयोग से ये चुनौतियाँ अवसर में बदल सकती हैं।


युवा क्यों चुनें किसान करियर?

  • टेक्नोलॉजी + खेती = भविष्य

  • कम पढ़ाई में भी बड़ा व्यवसाय

  • समाज में सम्मान

  • देश सेवा का सीधा मार्ग

आज का किसान लैपटॉप, मोबाइल, ड्रोन और ट्रैक्टर – सब साथ लेकर चलता है।


निष्कर्ष

किसान होना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक गौरवपूर्ण करियर विकल्प है। यह करियर आपको

  • आत्मनिर्भर बनाता है

  • प्रकृति से जोड़ता है

  • समाज का पेट भरने का सौभाग्य देता है

यदि युवा पीढ़ी आधुनिक सोच के साथ खेती को अपनाए, तो किसान न केवल समृद्ध होगा, बल्कि भारत को भी समृद्ध बनाएगा।

“जय जवान, जय किसान” केवल नारा नहीं, बल्कि एक सशक्त करियर की पहचान है।

Monday, December 22, 2025

गणित और अध्यात्म – एक सरल समझ



गणित हमें जीवन को व्यवस्थित करना सिखाता है। इसमें हर सवाल का एक तय उत्तर होता है और हर उत्तर तर्क पर आधारित होता है। जोड़, घटाव, गुणा और भाग से हम बाहरी दुनिया की समस्याएँ सुलझाते हैं।

अध्यात्म इससे अलग रास्ता दिखाता है। यहाँ सवाल काग़ज़ पर नहीं, मन और अनुभव में हल होते हैं। अध्यात्म हमें बताता है कि असली उलझन बाहर नहीं, भीतर होती है।

निराकार और निर्लेप का अर्थ है—जो सबको छूता है, पर किसी से चिपकता नहीं। जैसे हवा हर जगह बहती है, पर किसी एक जगह बँधती नहीं। समस्या तब शुरू होती है जब इंसान अपने विचारों, भावनाओं और पहचान से चिपक जाता है। यही “लेप-चेप” मन को भारी बना देता है।

गणित में गलती सुधारी जा सकती है, लेकिन जीवन में पहचान की गलती—“मैं सिर्फ यही हूँ”—अंदर अशांति पैदा कर देती है। अध्यात्म हमें हल्का होना सिखाता है, चीज़ों को समझकर छोड़ना सिखाता है।

गणित जीवन चलाने का साधन है,
और अध्यात्म जीवन को समझने की कला।
दोनों ज़रूरी हैं, पर संतुलन वहीं बनता है जहाँ समझ गहरी हो जाती है।




Tuesday, December 16, 2025

ज्योतिषाचार्य नूपुर : ज्ञान, अभ्यास और आध्यात्मिक ऊर्जा की यात्रा

 



मध्य प्रदेश की रहने वाली नूपुर की जीवन-यात्रा प्रेरणा से भरी हुई है। पेशे से वह पहले एक शिक्षिका थीं। पढ़ाना उनका कर्म था और विद्यार्थियों को सही दिशा देना उनका धर्म। लेकिन जीवन में कभी-कभी कोई नई सूचना, कोई नया ज्ञान हमारे भीतर छुपे सपनों को जगा देता है। नूपुर के साथ भी ऐसा ही हुआ।

एक दिन उनका संपर्क ज्योतिष से जुड़ी खबरों और लेखों से हुआ। यह विषय उन्हें इतना आकर्षित करने लगा कि उन्होंने इसे गहराई से समझने का निर्णय लिया। उन्होंने विधिवत ज्योतिष का कोर्स जॉइन किया और नियमित अध्ययन के साथ पूरे समर्पण से उसे पूर्ण किया।

नूपुर बताती हैं कि बचपन में उनका सपना डॉक्टर बनने का था। जीवन की परिस्थितियों में वह सपना अधूरा रह गया, कहीं न कहीं एक खालीपन था। लेकिन जब उन्होंने ज्योतिष को अपनाया, तो उन्हें लगा कि वही अधूरा सपना एक नए रूप में पूरा हो गया है—लोगों के जीवन की समस्याओं का समाधान करना, उन्हें मार्गदर्शन देना और मानसिक शांति देना।

“ज्योतिषाचार्य” और “शास्त्री” की उपाधि उन्हें सम्मान देती है, लेकिन वह साफ कहती हैं कि केवल डिग्री या उपाधि पर्याप्त नहीं होती।
उनके शब्दों में—
“असली ज्ञान अभ्यास से आता है। जब हम निरंतर प्रैक्टिस करते हैं, तभी हम विशेषज्ञ बनते हैं।”

हस्तरेखा शास्त्र, ग्रह-नक्षत्रों की गणना, गणितीय ज्योतिष और समय की सूक्ष्म गणनाएँ—ये सभी ज्योतिष के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। नूपुर मानती हैं कि हर समस्या का समाधान संभव है, बस सही मार्ग और सही ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

उनके अनुसार, सर्वोच्च शक्ति से जुड़ना ही सबसे बड़ा उपाय है। सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ने के कई मार्ग हो सकते हैं—प्रार्थना, अच्छे कर्म, या सेवा। कभी 21 दिनों तक गाय को हरा चारा देना, कभी ब्राह्मणों को भोजन कराना, तो कभी जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र देना—ये सभी कर्म अनजाने में भी हमारी ऊर्जा को सकारात्मक बना देते हैं।

नूपुर कहती हैं कि यह सब कोई नई बात नहीं, बल्कि सदियों पुरानी अनुभूतियों और अनुभवों का सार है—
“अच्छा करो, अच्छा बनो, और अच्छा ही पाओ।”

आज नूपुर ब्रह्माकुमारीज़ से भी जुड़ी हुई हैं और एक आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जीवन का आनंद ले रही हैं। ज्योतिष और अध्यात्म का यह सुंदर संगम उनके जीवन को संतुलन, शांति और संतोष से भर रहा है।

नामी : शांति, शक्ति और संकल्प की कहानी


भोपाल—झीलों का शहर—यहीं रहती है नामी। एक सामान्य-सी दिखने वाली, पर भीतर से असाधारण कामकाजी महिला। आज वह नौकरी भी कर रही है, ऑनलाइन बिज़नेस भी संभाल रही है और परिवार को प्रेम से जोड़े हुए है। लेकिन यह यात्रा इतनी सहज नहीं थी।

एक समय था जब नामी घर पर ही रहती थी। उसका अधिक समय ब्रह्माकुमारीज़ के ज्ञान, मेडिटेशन और आत्मचिंतन में बीतता था। वह भीतर से शांत थी, पर बाहर की दुनिया को यह शांति “काम” नहीं लगती थी। एक दिन उसकी सास ने कटु शब्दों में कहा,
“तुम कुछ करती ही नहीं हो, बस बीके-ज्ञान, बीके-ज्ञान… इसका क्या उपयोग?”

ये शब्द नामी के दिल में गहरे उतर गए। वह जानती थी कि ज्ञान उसे अंदर से मजबूत बना रहा है, लेकिन वह यह भी समझ गई कि केवल भीतर की शक्ति काफी नहीं—उसे कर्म में भी लाना होगा।

उसी दिन उसने निर्णय लिया। शांति को शक्ति बनाकर आगे बढ़ने का।
नामी ने नौकरी शुरू की, साथ ही घर से ऑनलाइन बिज़नेस भी। शुरुआत आसान नहीं थी, पर धैर्य था, अभ्यास था और ऊपर वाले पर भरोसा था।

नामी अक्सर मुस्कुराकर कहती है,
“जब मैं ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ी, तो मुझे जीवन के सभी प्रश्नों के उत्तर मिले। एक अजीब-सी तृप्ति मिल गई—कंटेंटमेंट मिल गया।”

उसका पसंदीदा गीत जैसे उसके जीवन का मंत्र बन गया—
‘ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं,
मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है।’

नामी का विश्वास है कि हर इंसान को जीवन के उत्तर मिल सकते हैं—बस थोड़ा धैर्य रखना पड़ता है।
वह कहती है,
“शांति का रास्ता इंतज़ार कर रहा है, और ईश्वर की कृपा पहले से ही आपके साथ है।”

भोपाल से उसका गहरा लगाव है—प्रकृति, वातावरण, इंसानियत—सब उसे प्रिय हैं। वह हर दिन एक ही प्रार्थना करती है,
“सबका कल्याण हो।”

आज नामी कई महिलाओं को प्रेरित करती है। वह कहती है कि आज के समय में घर से नौकरी, ऑनलाइन बिज़नेस या कॉल सेंटर का काम एक अच्छा विकल्प है—बस ज़रूरत है धैर्य, अभ्यास और सकारात्मक सोच की।

नामी की कहानी यही सिखाती है—
आध्यात्मिकता जीवन से भागना नहीं,
बल्कि जीवन को सुंदर ढंग से जीने की शक्ति है।