Monday, February 16, 2026

शीर्षक –हमारे गांव का पीपल

 


हमारे गांव का पीपल दो भाइयों में बट गया है।

वहीं पर एक कुआं था वह कुआं भी बट गया है।

गांव सुंदर बहुत था एक सुंदर सा नजारा था 

इसी पीपल के नीचे बैठकर कुछ पल गुजरा था।

वही एक बैठका का था गांव का सब लोग आते थे।

सयाने हो युवा बच्चे सभी कुछ पल बिताते थे।

समय की बात है अब वो पीपल कट गया है।

पता चला दो भाइयों में बट गया है।

नजर जब कुएं पर गई तो देखा कुआं भी पट गया है।

कुछ लोगों ने बताया दो भाइयों में बट गया है।

कुआं और पीपल जब से हट गया है।

वहां न कोई आता है ना जाता है सिर्फ सन्नाटा है।

कुआं और पेड़ एक प्रकृति है इसे न बाटो।

न पेड़ को काटो न कुआं को पाटो। 

यह दृश्य देखकर हमारे मन में कुछ खटक गया है।

हमारे गांव का पीपल दो भाइयों में बट गया है।


*ओम शांति** 

रचनाकार *–सुरेश चंद्र केशरवानी* 

(प्रयागराज शंकरगढ़)

मोबाइल नंबर –9919245170

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