ओम शांति
नवरात्री के इस पावन दिवस पर आप सब का स्वागत है, आइये आज फिर से हम अपनी
आत्मा की शक्ती को जाने पहचाने और आनुभव करे
आज हम महाकाली शक्ती स्वरूप का अभ्यास करे
महाकाली को असुर सस्कारो को मिटनेवाली कहते है ,जब धरती पर बहुत पाप और बड़ते असुरी सस्कर अपनी चरम सीमा पर होते तब परमात्मा शिव से शक्ती
लेकर माँ काली ने पुरे संसार को असुरी संस्कारो से मुक्त कर दिया थी अब फिर से वही
समय चल रहा है तो आइये इस रूहानी यात्रा पर ......
अपने को इस संसार से अलग चेतन आत्मा अनुभव करे ,परम शक्ती से मिलन मनाने की
लिए परमधाम की और उड़ान भरे ,इस आवाज की दुनया से दूर ..सूरज चांद सितारों से
...सूक्ष्म वतन आप आत्मा आकरी रूप में पहुँच गये है ....और वतन में बाप दादा आपका
स्वगत कर रहे है बापदादा को देख आप हर्षित हो रहे है आप ख़ुशी खुशी बाप दादा के साथ
मिलकर सुस्म वतन का आवलोकन कर रहे है इस अलोकिक यात्रा बाद आप और उडान भर रहे है
...
अब मै आत्मा परमधाम शांतिधाम में पहुँच गयी हूँ .... मेरी आत्मा परम शांति का
अनुभव कर रही है और यही मेरा सच्चा घर है ... यही से मै आत्मा पाठ बजाने संसार में
आती हूँ ... अब मुझ आत्मा का महा मिलन हो रहा है अपने पिता परमात्मा से मेरे पिता परमात्मा सर्व शक्तिमान है उन से
सर्व शक्तिया मुझे मिल रही है में आत्मा
परम शक्ती से भरपूर हो रही हूँ....
( कुछ पल इसी अवस्था में खो जाईये ... )
अब आप आत्मा शिव शक्ती स्वरूपा बन गयी है और अपने संकल्प शक्ती के द्वारा आप
शुक्ष्म लोक में आ रही है . जहा आप बापदादा से मुलाकात कर रहे है .. उन से मीटी
मिटी रूह रिहान कर रहे है ..और इसी बीच बाबा आपको सन्सार की वर्तमान समय से अवगत
करा रहे है ..जहा मनुष्य आत्माये असुरी संस्कारो के वशीभूत हो पाप कर्म कर रहे
है.. जिस के वजह से सारी दुनिया पतित, दू खी और अशांति हो गयी है ... इस दृश को
देखते ही मुझ आत्मा को कल्प पहले वाली श्रेष्ठ स्मृति शिव शक्ती स्वरूपा माँ काली
की याद आ गयी...
(गीत---)
और मै आत्मा अपनी श्रेष्ठ स्वमान से शिव बाबा से मिलकर विश्व कल्याण के कार्य
में सहयोगी बनी और मै आत्मा शिव शक्ती माँ काली बन गयी... ( म्यूजिक )
परमधाम से सफ़ेद चमकीली रंग की किरणे निकल रही है और मुझ आत्मा से होकर पुरे
संसार में पहुँच रहे है .... धीरे धीरे परमधाम से शक्तियों की किरणे आ रही है और
आप आत्मा से होते हुवे पुरे संसार में फ़ैल रहे है ... (इस दृश में खो जाईये )
अब संसार की सभी आत्माए असुरी संस्कारो से मुक्त हो गयी है चारो ओर शांति फ़ैल
गयी है और एक नया सबेरा होने को है... जहा सभी आत्माए सुख शांति और समृद्दी का
जीवन अनुभव करेंगे...
और मै आत्मा अपने श्रेष्ठ स्मृति से शिव शक्ती माँ काली की इस स्वमान को याद
करते हुवे नीचे की ओर आ रही हूँ ... शक्ती स्वरुप का अनुभव मेरे मन बुद्धि को
शुद्ध और पवित्र बना दिया है ..
और आज से मेरे मन बुद्धि और संस्कार आत्मा
स्मृति से ही कर्म करेंगे जिस से मै आत्मा श्रेष्ठ कर्म का भाग्य जमा
करुँगी ... मेरे कर्म ही मेरे पहचन है ... सर्व के प्रति शुभ भाव शुभ कमाना करना
ये आत्मा की संस्कार है येही सच्चा धर्म है..
ओम शांति शांति शांति...
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