Sunday, March 10, 2013

" आंखे है बड़े अनमोल इनका ध्यान इस तरह किजिये "


1) एक गिलास नींबू पानी रोज पीने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।प्याज का रस आंखों में डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।मसूर की दाल घी में छौंक लगाकर खाने से भी आंखों को शक्ति मिलती है।पैरों के तलवे में सरसों के तेल की मालिश करने, स्नान से पूर्व अंगूठे को सरसों के तेल से तर कर देने से आंख के रोग नहीं होते, आंखों की रोशनी बढ़ती है।

 2) रुई को गर्म दूध में भिंगोकर ठंडा कर लें और फिर उसे आंखों पर रखें। आंखों को ठंडक मिलेगी। सूखे नारियल की गिरी और 60 ग्राम शक्कर   मिलाकर रोजाना एक सप्ताह तक खाने से आंखों के सामान्य रोगों में लाभ होता है। गन्ना व केला खाना आंखों के लिए हितकारी है। आंखों को स्वस्थ रखने
के लिए अच्छी नींद जरूरी है।
 
3) कम रोशनी में या लेटकर पढऩे से बचें इसलिए नहीं क्योंकि इससे आंखें कमजोर होती है बल्कि इसलिए क्योंकि इससे आंखों को थकान होती है। ऐसे में पढऩे से आंखे कमजोर तो नहीं होती है लेकिन सिरदर्द व आंखों से पानी आने की शिकायत होने लगती है। इसका स्वाभाविक कारण पोजीशन का बदलाव ।आंखो में पानी आने का कारण जो आंसू होते हैं वो अश्रु मार्ग से बहने के बजाए आंखों से रिसने लगते हैं तो आंखों से पानी आने का एहसास होता है
 
 PIX: 5 काम जिन्हें करने से आंखों को ठंडक मिलेगी, चश्मा नहीं लगेगा
 
4)  रात को मिट्टी के बर्तन में दो चम्मच त्रिफला एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह छानकर उस पानी से आंखे धोने से आंखे स्वस्थ रहती हैं ।रूई को गुलाबजल में भिंगाकर आंखों पर एक घंटा रखने से गर्मी से होने वाले नेत्र रोगों में आराम मिलता है।रात को आठ बादाम की गिरी को पानी में डालकर छोड़ दें। सुबह उसे पीस कर पानी मिलाकर पी जाएं।
 
5) आंखों की सही देखरेख व पोषण के अभाव में ही अधिकतर लोगों को चश्मा लगता है और एक बार जिन लोगों को चश्मा लगा होता है उनके नंबर बढ़ जाते हैं या आंखों संबंधी और कई अन्य समस्याएं उन्हें घेर लेती हैं। ऐसे में आंखों की सुरक्षा के लिए सभी को सावधानी बरतनी चाहिए। यहां हम कुछ टिप्स बता रहे हैं जिनसे आपकी आंखों की रोशनी तेज रहेगी और आंखे थकेगी नहीं।
 
6) फलों ,सब्जियों,खासकर पत्तेदार हरी सब्जियों के अधिक सेवन करने से आंखें सुरक्षित रहती है। विटामिन ए और विटामिन ई के को अपने खानपान में शामिल करके आंखों को स्वस्थ रखा जाता है। अगर खानपान में शामिल न कर सकें तो सप्लीमेंट के जरिए विटामिन ई हासिल कर सकते हैं सभी प्रकार के खाने वाले तेलों में गिरीदार फलों तथा बीजों में विटामिन ई पाया जाता है।अगर खानपान को समय रहते ही सुधार लिया जाए तो तमाम परेशानियों से बच सकते हैं।
 
Thank you -collection from- Dainik Bhasker News paper.

 

Rajkiya Vidyalay Sawroopjung

Sometime it makes a magic when we learn from outside source who teaches us without any benefit and it makes different as i  was on the way outdoor on service i suddenly got a call of beru who is a naturopath and living in Jadoli village and practically follow some hard rule such as walking he travel near buy villages by walking only when their is some urgency then is take lift otherwise he love to walk ....and also same with mobile also he have mobile but uses only when their is no alternative.........still today he as given a talk on zero level life style for 2500 students ..he practically keep note how much time is walked and how much money he saved is is a man who counts the saving not the expenditure ..........for saving we use such as razor
 cream aftershave  etc but beru  use a blade with alovera and the blade sharp not ends here  and he as saved
12000 rupees by shaving.....Thank  you. radio madhuban 90.4 Fm

Saturday, March 9, 2013

Ek choota sa Thota Re...........Radio Madbhuban

In our India Most of the villagers are not educated and still today the process is on going but not fully implemented in ground level the govt tries but still the improvement is very poor in a serve i find that most the Indian womens of villages are not educated and they have interest for education but they are not able to come to the education center but if any one can try to teach them is possible but he or she should go to their village and teach ......The reason is they are poor and life is based on daily wages if one man is going out to work then women should look after the home work and also fields or to take care of young one  etc....
still Their is hope .. if we make some awareness about education and campaign the Interest level of the women and man can move them to education center.

Friday, March 8, 2013

Bade Dino Par Meri hui Jab

 बड़े दिनों पर मेरी हुई जब मुझ से मुलाकात
 बन कर चाँद तुम्ही  ने देखा सुन ले सारी बात -2 
 मेरे दिल की बात वो बाबा ..........2 

सामने मैंने अपने अहम् का  रखा था दिया जलाकर  ..2 
फिर क्यों  मुझ को ख्याल ही आता देखू नजर उठाकर 
दिया भुझाया होते हुवे देख…2  रोशनी की बरसात 
बन कर चाँद तुल्ही ने देखा सुन ले सारी बात
बड़े दिनों पर मेरी हुई जब मुझ से मुलाकात
बन कर चाँद तुम्ही  ने देखा सुन ले सारी बात 

पास तनिक जो तेरे आये खुल गए ज्ञान के नैन  
                                खुद का रूप तुम्ही सा पाकर मिला है मन को चैन .. 2 
    बन के रहू दिल तक्तनशिन में .......2  दिल में है जज्बाद 
बन कर चाँद तुम्ही  ने देखा सुन ले सारी बात
बड़े दिनों पर मेरी हुई जब मुझ से मुलाकात
बन कर चाँद  तुम्ही ने देखा सुन ले सारी बात 

तेरे नूर से रोशन है अब अपना जहान  सारा ...2 
ज़िन्दगी  स्वागत  तेरी तो गम का क्यों अँधियारा 
साथी प्रभू  है फ़क्र है मुझको ......2  फिर कैसी  फ़िकरात  
बन कर चाँद तुम्ही ने देखा सुन ले सारी बात
बड़े दिनों पर मेरी हुई जब मुझ से मुलाकात
बन कर चाँद तुम्ही ने देखा सुन ले सारी बात -2 
मेरे दिल की बात वो बाबा

Thursday, March 7, 2013

ये खुदा तू बता तेरा क्या नाम है



ये  खुदा तू बता तेरा क्या नाम है, तू है रहता कहाँ तेरा क्या काम है  2
क्या है तेरी हक़ीकत जो गुमनाम है, तुझ पे खुद को छुपाने का इल्ज़ाम है


तूने दुनिया बनाई क्यू मक़सद बता...2

रूहें इसमें बसाई क्यू मतलब जाता...2

तेरे जलवों से रोशन ज़मीन आसमान, क्यू किसी को नज़र ना आता यहाँ

तेरी परदनशीनी का अंजाम है ढूंड था आज भी तुझको इंसान है

ये खुदा तू बता तेरा क्या नाम है, तू है रहता कहाँ तेरा क्या काम है


धर्म मज़हब में है तेरे चर्चे बयान, शान में तेरी लिखते हैं पर्चे वहन...2

सबके भगवान अपने ही अपने जहाँ, ना समाज तुझ को समझे ना लड़ते यहाँ

तू समजदार होके भी अंजान है, है बड़ी करदे इंसान को बदनाम है...

ये खुदा तू बता तेरा क्या नाम है, तू है रहता कहाँ तेरा क्या काम है


तूने जन्नत बनाने की मेहनत भी की फिर ये धोजक कोलने की ज़हमत क्यो की

खेल कैसे गाज़ाब था घजाब ढा दिया, नेकियों को बड़ी से मिला जो दिया

लेना कब तक तुम्हे सबका इंतिहान है, अब सभी के दिलों में ये अरमान है

ये खुदा तू बता तेरा क्या नाम है, तू नाम है, तू है रहता कहाँ तेरा क्या काम है

ये खुदा तू बता तेरा क्या नाम है, तू है रहता कहाँ तेरा क्या काम है...

क्या नाम है...ह्म

ये खुदा...4. "

Wednesday, March 6, 2013

Kasturba Gandhi Balika Vidyalay Sports & Cultural Prog.

 नमस्कार ६ मार्च २०१३ को माउंट अबू पोलो ग्राउंड में विशेष पहला राज्य स्तरिया खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगता का समापन समारोह था जो की अपने आप में एक अलग पहचान कस्तुबा गाँधी गल्स विद्यालय की देती है इस विद्यालय की विशेषता ये है की यहाँ जो भी बालिका पढ़ने आती है वो स्कूल ड्राप आउट होती है या फिर उसे पढ़ने का मोखा  नहीं मिला हो किसी कारण वश माता पिता गरीब हो या घर की कोई बात हो जीने पढ़ने का मोख नहीं मिला हो ऐसी बालिका वो को यहाँ एडमिशन  दिया जाता है
 और उन्हें पढाया जाता है .
अब पहली बार  राज्य स्तरिया खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगता का आयोजन माउंट अबू पोलो ग्राउंड में इन बालिका वो के लिए आयोजीत किया गया था जो अपने आप में एक सराहनीय कदम है इस का आयोजन अतिरिक जिल्ला समन्वय कांतिलाल कतरी और उन के साथियों ने बहुत ही बढ़िया करियक्रम बनाया और उस को साकार रूप दिया .
 इस में दो बाते थी एक तो खेल और दूसरा सांस्कृतिक कार्यक्रम दोनों ही प्रतियोगिता चली और तीन दिन का ये विशाल आयोजन बालिका वो में
एक नया जोश और उमंग और समझ भर दिया है उनके चेहरे और बोल से लगता था की बालिका वो को ऐसी विशाल आयोजन की जरुरत थी जो बहुत समय के बाद सुरु हुवा और उसका पूरा पूरा लाभ बालिका वो ने उठाया है और इस आयोजन का एक और बहुत ही सफल कार्यक्रम ये भी 
 था की बालिका वो को जेंडर की शिक्षा और आत्मा विश्वास जागने के लिए विशेष सेल्फ सिक्यूरिटी का ट्रेनिंग दिया गया जो बलिकवो को कभी कभी आधारित न होना पड़े .....
कांतिलाल कतरी और बहार से आये हुवे सभी टीचर्स और आयोजक बहुत ही लगन के साथ इस कार्यक्रम को सफल बनाया और बालिका वो की उमंग देख उन्हें भी बहुत ख़ुशी और आगे भी इस तरह के  प्रयोग करने का
 संकल्प लिया है
बालिका वो में  दम कम देख टीचर्स का उमंग भी आस्मां को छु रहा था क्यू की बालिका वो के साथ वो भी बच्चे बन गए थे और बालिका वो की प्रस्तुति देख वो आश्चर्य चकित हो गए थे .बालिका वो की प्रातिबा का वो बहुत गुण गन भी कर रहे थे अलग अलग  विभाग में प्रतियोगता का आयोजन भी अलग पहचान बना रहा था
 बालिकाए भी अपनी अलग पहचान बना रही थी खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम में कोई एकल गायन तो समुह गायन में कोई नाटक में कोई डांस में और कुछ खेल में भागदौड़ , कबड्डी , क्रिकेट , अदि अदि  ....में अपनी पहचान बनायीं है ...
आयोजक और टीचर्स का प्रयोग है की ये बालिका वो को नेशनल और स्टेट लेवल का खेल में भाग लेने का मोख मिले और साथ ही भारत और विदेश में भी खेल या संस्कृतक कार्यक्रम के जरिये ये बालिकाए आगे बड़े
और अपना नाम करे ये कोशिश है .. सभी टीचर्स बालिका वो की परतिभा के बारे में बता रही थी की ये कही भी दुसरे बालिका वो से अलग नहीं है
इन में भी वाही जोश और उमंग और कुछ करने की जज्बात है इन्हें सही तरह से ट्रेन किया जय और मोख मिले तो ये भी सानिया और पी टी उषा जैसी बन सकती है ........तो ये थी कुछ काश बाते कस्तूरबा गाँधी बालिका  विद्यालय की . पहला राज्य स्तरिया खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगता का समापन समारोह की ........                            .रेडियो मधुबन 90.4fm सुनते रहो मुस्कुराते 

Krishi Milet Bazara Mela At Sirohi







नमस्कार  किशन भाई बहनों  जिल्ला सिरोही में ५ मार्च को किशानो का काश आकर्षण मिलेट (बाजारा ) मेला
आयोजन सिरोही कृषि के द्वारा किया गया था जो की अपने आप में अनोखा रहा ...जिस में किशानो को बाजारा  का महत्व बताया गया और बाजारा  एक विशेष खाद्य पदार्थ है जो हमारी सवास्थ की रक्षा करता है डायबिटिक या शुगर पेसंट को आराम देता है और इस को विबिन रूप से खाने के उपयोग में लिया जाता है आज मार्किट में बाजारा  के बिस्कुट भी मिल रहे है बाजारा  का रोटी बना सकते है किचड़ी बना सकते है लड्डू बना सकते है ..जो चाहे आप बना कर इस का उपयोग अच्छे सेहत के लिए कर सकते है ....सुंदर सेहत का राज है बाजारा  .....मेला का मुक्य आकर्षण बाजारा  के वेंजन रहा जो किशान भाई बहनों के बीच एक परतियोगिता का भी आयोजन किया गया था जिस में किशनोने  बहुत ही उमंग से  हिस्सा लिया और आयोजन को सफल बनाया जिस के लिए उन्हें विशेष इनाम भी दिए गए .......साथ ही साथ नए टेकनिकी की जानकारी किशानो को दी गयी और विशेष किशान महानुबवो से भी अनुभवों का लाभ दिया गया जो की आपने आप में एक सराहनीय कदम है दुसरे किशान भाई  बहनों के लिए ....और विबिन स्टाल लगे थे जो अलग अलग खेती करने और बीज उपचार  की जानकारी दे रहे थे ......और अंत में एक विशेष बात कहना चाहूँगा किशान की जीवन कहानी पर  (SDM)
महोदय ने प्राकश डाला  की कब तक किशान मार्किट के दलालों से जुजता रहेगा आज किशान पूरा साल मेहनत करता है और भाव उसको वाही मिलता है जो दस साल पहले मिला था उसके घर में या जीवन शैली में कोई परिवतन नहीं हुवा है वो हमारा अन्न दाता  होकर भी कर्ज में डूबा है  उसे अपने हक के लिए भी यहाँ वहा भागना होता है जब की किशान का पैदा किया आनाज को बाज़ार में बेचकर लोग आलीशान ज़िन्दगी जी रहे है उनके पास सब कुछ है और किशान के पास कुछ भी नहीं  ऐसा क्यू ? इस पर हम सब को सोचना है और काश कृषि अधिकारी सोचे की इसका निधन क्या है और कैसे हो सकता है ..धन्यवाद ... ये  शब्द  सब के दिलो को छु गया और पूरी सभा तालियों की आवाज़ से गूंज उठी ......पर क्या अपने कभी इस बारे में सोचा है अगर नहीं तो एक बार सोचिये और इस पर कुछ करिए ......आपका अपना रेडियो मधुबन 90.4fm सुनते रहो मुस्कराते रहो.