Tuesday, April 16, 2013

"पानी पर खीची गई लकीर "

पानी पर खीची गई लकीर 

पानी पर खीची गई लकीर की कोई उम्र नहीं होती 
जीवन भी लगभग ऐसा ही है 
पता नहीं कब कूच करने का नगाड़ा बज जय 
जीवन में ख़ुशी और गम के साथ एक अस्मंजसता  बनी है 
कल किसने देखा है कौन कब कैसे उठेगा कुछ पता नहीं है 
अगर ये सत्य है तो हम सब को अभी सोचना होगा  और करना होगा 
अत : सौ काम छोड़कर सत्संग में जाना चाहिए और 
हज़ार काम छोड़कर धर्म -ध्यान करना चाहिए 
अगर आज ऐसा नहीं किया तो कल बहुत बुरा होगा 
जैसे ...सोमवार को जन्म हुआ , मंगलवार को बड़े हुवे ,
बुधवार को विवाह हुआ , गुरुवार को बच्चे हुवे ,
शुक्रवार को बीमार पड़ गए , शनिवार को अस्पिताल गए 
और रविवार को चल बसे ........
अपने दिल से पूछिए ...क्या येही ज़िन्दगी है 

अमानत है ज़िन्दगी

" अमानत है ज़िन्दगी  "
एक गहरी बात ये है जो सत्य है और 
हम सब जानते हुवे भी अन्जान रहते है 
दुनिया में तुम्हारा अपना कोई नहीं है 
जो कुछ तुम्हारे पास है वह एक अमानत है 
बेटी है तो वह दामाद की अमानत है 
बेटा  है तो वह बहू की अमानत है 
शारीर श्मशान की और ज़िन्दगी मौत की अमानत है 
तुम देखना ....एक दिन बेटा  बहू का हो जायेगा ,
बेटी को दामाद ले जायेगा ,
शारीर श्मशान की राख में मिल जायेगा 
और ज़िन्दगी मौत से हार  जायेगी .
कहना ये है की अगर ये सत्य है तो 
अमानत को अमानत समझ कर ही उसकी 
संभाल करना है और अगर उस पर 
माल्कियत को जताया तो रोना पड़ेगा 
क्यू की ये फिर अमानत में कायनात हो जायेगा 
रिलैक्स या ख़ुशी का अनुभव करना है 
तो अमानत को अमानत ही समझना है 

Sunday, April 14, 2013

नेचुरल अटेन्सन


नेचुरल अटेन्सन लाने के लिए बहुत काल का (अटेन्सन देने का )अभ्यास चाहिए तब ही हम नेचुरल अटेन्सन
का अनुभव कर सकते है  जिस से हमको टेंशन आ नहीं सकता  
when we keep natural Attention then we will away from Tension but the problem is to keep natural attention one should have  a good practice of Natural Attention first.

सत्य का रास्ता क ि न है

सत्य का रास्ता क ि न है 
इस रस्ते पर हज़ार चलने की सोचते है मगर 
सौ ही चल पाते है .नौ सौ तो सोचकर ही रह जाते है 
और जो सौ चल देते है, उनमे केवल दस ही मंजिल तक जाते है 
नब्बे तो रस्ते में ही भटक जाते है 
और जो दस जाते है , उनमे भी सिर्फ एक ही सत्य को उपलब्द हो पता है 
नौ फिर भी किनारे पर आकर डूब जाते है 
तभी तो कहते है कि सत्य एक है और याद रखे ..
सत्य परेशान तो हो सकता है लेकिन पराजित नहीं 
माना सत्य की नैयया हिलेगी दुलेगी पर डूबेगी नहीं 

Saturday, April 13, 2013

फीचर से फ्यूचर बनता है



फीचर से फ्यूचर बनता है पर इस के लिए वर्तमान को बेहतर समझना होगा वर्तमान को  समझने के लिए एकान्त  बेहद जरुरी है जितना आप  एकान्त का  अभ्यास  करेंगे उतना ही समझ की मजबूती बढेगी और सोमान में रहना सहज हो जायेंगा जिस से आप सुख ,शांति और ख़ुशी की अनुभूति करेंगे और वाही अनेक आत्माओं का फ्यूचर श्रेष्ठ बना सकता है 

Friday, April 12, 2013

दिव्य बुद्धि का सही अर्थ


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  दिव्य बुद्धि का सही अर्थ

दिव्य बुद्धि का सही अर्थ है  बुद्धि माना सिंपल भाषा में बात करे तो विचार सुंदर और सकारात्मक विचार 
अंग्रेजी में किसी ने कहा है (thoughts can move mountains ) याने शुद्ध और पवित्र विचार, मन और बुद्धि को 
दिव्या बनाते है .जिस व्यक्ति को शुद्ध और सकारात्मक विचार करने का तरीका आ गया, तो बस उसकी ही बुद्धि दिव्या बनती  है और वाही सिद्धि स्वरूप बनता है एक और तरीका ये भी है मन के अन्दर शुद्ध भाव निर्माण करे जैसे दया, प्रेम ,करुणा ..जिससे आपकी बुद्धि दिव्यता को प्राप्त करेंगी और आप सिद्धि स्वरूप 
बन जाएंगे ...ॐ शांति  

" हिंदू नव वर्ष " और " चेत्र नवरात्री "

" हिंदू  नव  वर्ष " और " चेत्र नवरात्री "

११ अप्रैल २०१३  ये दिन  वर्ष  का सब से सुभ माना गया है  आज हिंदू धर्म के अनुसार  नया साल है जिसे  सभी राज्य में मनाया गया और ख़ुशी की बात ये है की आज नवरात्री की भी सुरवात है और महारास्ट्र में आज गुड्डी पड़ाव के नाम से और अन्द्र प्रदेश में उगादी के नाम से सिंद प्रांत में हिन्दू नव वर्ष  अन्य दुसरे राज्य में भी इसी तरह का उत्सव मनाया गया आईये अब आबू रोड की बात करते है ...
शक्ति की परम कृपा प्राप्त करने हेतु सम्पूर्ण भारत में नवरात्रि का पर्व वर्ष में दो बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तथा आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को बड़ी श्रद्धा, भक्ति व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जिसे चैत्र व शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है

 नवरात्रि के व्रत का पारण (व्रत खोलना) दशमी में करना अच्छा माना गया है, यदि नवमी की वृद्धि हो तो पहली नवमी को उपवास करने के पश्चात्‌ दूसरे 10वें दिन पारण करने का विधान शास्त्रों में मिलता है। नौ कन्याओं का पूजन कर उन्हें श्रद्धा व सामर्थ्य अनुसार भोजन व दक्षिणा देना अत्यंत शुभ व श्रेष्ठ होता है। इस प्रकार भक्त अपनी कर सकते है ऐसा रमेश  अग्रवाल जी ने कहा और जब हम मणीलाल पंडितजी से बात की तो जिस तरह की मेरी सोच थी उस से अलग उनोहों बताया भक्ति आदि जो भी है ये अपने मन को खुश करने की बात है सही बात तो ये है की आप अपने घर में जो माँ या दादी है उनकी अच्छी तरह से सेवा करो और आपकी पत्नी या बेटी है उनका भी दिल से सम्मान करो और उनका धयान रखको येही बड़ी सेवा और भक्ति है और जो बाज़ार या रास्ते में महिला को देखो तो उनको भी उतना ही सम्मान दो जितना आप अपने घर के लोगो को देते हो .......
आबू रोड के बहुत लोगो से मेरी बात हुई सब के दिल में बहुत उमंग और उत्साह था आज एक ख़ुशी उनके चहरे पर थी ऐसा लग  रहा था की उनको आज कुछ अनोखी ख़ुशी मिल रही हो जिसका वो शब्दों में वर्णन नहीं कर पा रहे थे पर भाव उनके चहरे से पता चल रहा था .