Thursday, February 11, 2016

Dadi Janki ji A spiritual Way - 3

दादी जानकी जी ......

आध्यात्मिकता किसी आश्रम में रहने की बात नहीं है। दादी जानकी का जो तीसरा चारित्रिक गुण है, वह यह कि वह प्रत्येक प्रश्न, प्रत्येक समस्या को उसके शुद्धतम रूप में, उसकी जड़ में जाकर समझती है। दादी जी से जब कोई सवाल करता है चाहे वो बड़ा हो या छोटा हो दादी उसे सुनती है और उसे अपने चेतना के साथ जोड़कर उसका जवाब ढूंढ़ती है। इस से मैंने ये सीखा की हम सब के अंदर एक अदृश्य शक्ति है और उस का उपयोग नहीं करते है लेकिन दादी उसका उपयोग बखूबी करती है। इस लिए उनका जवाब सब के अन्तकरण को छू लेता है। और दादी जब भी बात करती है तो वो दर्शकों के सर्वभौमिक प्रकृति और स्वाभाव की बात करती है जो हम सब की एकता है आध्यत्मिक एकता है जीवन में हम सब को इस पर काम करना है जो सत्य है वास्तविकता है। दादी जो कुछ कर रही है उसके लिए आत्माबल चाहिए अगर हम भी इस तरह कुछ करे तो दुनिए के विपरीत दिशा में जायेंगे। जहाँ दादी बहुत आगे निकल चुकी है। दादी के कदम के निशान पे भी अगर हम चलेंगे तो आज हम दुनिया की जिन तमाम मसालों पर जहा हम लंबी बहस कर रहे है वो न कर अमन और शांति की अनुभूति में लग गए होते। 

Tuesday, February 9, 2016

Dadi Jankiji A spiritual way - 2

ॐ शांति
एक आध्यात्मिक गुरु या नेता या अभिनेता वही होता जिनके अन्दर एक रूपांतरण या परिवर्तन करने की शक्ति या क्षमता हो। आप उन लोगों को पहचान सकते है, क्यों कि  वे केवल अपने अस्तित्व द्वारा आपके जीवन में बदलाव ला पाए है। कुछ लोग संसार में ऐसे भी जो अच्छा बोल सकते है, वो आपको ज्ञान दे सकते है, पर वे आपके लिए सबकुछ नहीं है। जैसे दादी जानकी जी को एक बार मिलते ही मेरे अंदर एक रूपांतरण हुआ और मैं दादीजी को अपना आदर्श मनने लगा। ऐसा बहुत बार हुआ की मै बहुत से गुरु या नेताओं से मिलता रहा पर दादीजी की एक मुलाकात मेरे जीवन का यादगार पल बन गया। और मुझे बार बार इस पर सोचने या मंथन करने के लिए महबूत किया।

हम सब चाहते है भाईचारा हो, घृणा ना हो, विरोध ना हो अगर ऐसा होता भी है तो हमारी योग्यता हो आध्यात्मिक प्रेम को साझा करने की। जैसे दादी का व्यक्तित्व आदर्श और वास्तविकता में कहीं भी ब्रेक डाउन नहीं है चाहें वो कही भी रहे। योग्यता मुलभुत रूप से एक व्यक्ति के चैतन्य के स्तर से जुडी हुई है।

जितना ही आपका चैतन्य का स्तर कम होगा, उतना ही अमृत और विष में अंतर करने या समझने की योग्यता कम होगी।  जितना आपकी चैतन्य का स्तर ऊचा होगा उतना आपकी योग्यता ज्यादा होगा।

आप किसी से पूछते है ," क्या आप प्रेम करते है ?" तो कहेगा ," हाँ मैं प्रेम करता हूँ ," पर हकीकत ये है जहाँ उसे प्रेम करना है वो प्रेम वहा नहीं दिखता। जैसे की संघर्ष के समय प्रेम होना चहिये पर नहीं है। और जिन्हें हम पसंद नहीं करते है वहा प्रेम होना चाहिये। ये भी मनुष्य की योग्यता पर है जो सब में नहीं है ये कुछ लोगो में है  जैसे दादी जानकी जी मैं मैंने देखा।

Monday, February 8, 2016

Dadi Jankiji A spiritual Way

दादी जानकी जी

एक रेशम की डोर जैसा उनकी ज्ञान की शुद्धता है ज्ञान रत्नों की चमक उनके पास है और वो चमक हर कोई जो उनसे मिलता है वो उस ज्ञान की चमक का अनुभव करता ही है चाहे वो कुछ सेकंड के लिए ही मिले हो। ज्ञान की सुंदरता से वो भरपूर है उनके हर शब्द हमारे हृदय के अंतरंग को छू लेते है। और हमें भी उस परम शक्ति को पा लेने की स्वत प्रेरणा देती है।
दादी जी कहती है हमें सिर्फ आत्मा का पाठ नहीं पढ़ना है लेकिन आध्यात्मिक शक्तियों का अनुभव करना है ज्ञान की गहराइयो में जाकर जीवन जीने का रास्ता ढूंढना है ज्ञान सिर्फ सुनने तक न हो बल्कि हमारे हर कर्म में ज्ञान का दर्शन हो।
दादी जानकी के साथ के वार्तालाप में एक अनोखा एकरूपता है और बड़ी दिलचस्प बात ये है की उनके  शब्दों में कोई मिश्रण नहीं है आज ये है तो कल वो है।  दादी को अपनी यात्रा का ज्ञान है ऐसे नहीं जैसे आप सिर्फ ड्राइवर के सीट पर बैठे हो और स्टेरिंग पर हाथ है और कोई दूसरा रास्ता बता रहा हो नहीं दादी को अच्छी तरह पता है कहा जाना है उसका पूरा नक्शा उनके बुद्धि में है।

Tuesday, February 2, 2016

ब्लड ग्रुप से व्यक्ति का स्वभाव


आपको ये सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लग रहा होगा कि ब्लड ग्रुप से व्यक्ति स्वभाव का भी तय हो सकता है!! अब भई हम नहीं जानते कि ये सच है या नहीं लेकिन जापानी ज्योतिषविद्या के अनुसार ये बात जानी जा सकती है कि ब्लड ग्रुप के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव की खास बातें क्या हैं।

ये बात तो आप जानते ही हैं कि जिन लोगों का ब्लड ग्रुप “ए” होता है वे लोग केवल अपने ही ब्लड ग्रुप के लोगों को रक्त दे सकते हैं और उन्हीं का रक्त ले भी सकते हैं। ऐसा ही ब्लड ग्रुप “बी” के साथ भी है।

इस गुण के आधार पर ही जापानी ज्योतिष विद्या के अंतर्गत ब्लड ग्रुप और व्यक्ति के स्वभाव के बीच संबंध को तलाशा गया है। आइए जानते हैं क्या कहती है जापानी ज्योतिष विद्या आपके विषय में।

जिन लोगों का ब्लड ए  ग्रुए है, उन लोगों की सबसे खास बात यह है कि ये लोग अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करने में बहुत हिचकिचाते हैं। इन्हें आप अपने लिए पर्फेक्ट मान सकते हैं बशर्ते आप इनकी खामियों को भी समझने में कामयाब रहें। इनकी खामियों की बात करें तो ये लोग काफी जिद्दी और अत्याधिक भावुक होते हैं। लेकिन इनकी खास बात यह है कि ये ईमानदार और समर्पित स्वभाव वाले होते हैं।

ब्लड ग्रुप ओ वाले सकारात्मकता होते है वहीं दूसरी ओर इनकी खामियों की बात करें तो बातों और घटनाओं को भूलना, आत्मकेन्द्रित होना, इनके स्वभाव को दूसरों के लिए मुश्किल बना देते हैं। 


ये एक दुर्लभ प्रकार का ब्लड ग्रुप है, लेकिन जिन लोगों के शरीर में एबी ब्लड ग्रुप का मेल होता है वे लोग काफी स्मार्ट और साथ ही जीनियस कहे जा सकते हैं। ये बहुत कम बोलते हैं और साथ ही बहुत जल्दी किसी के साथ घुलते-मिलते भी नहीं हैं। इस ब्लड ग्रुप के लोगों को तीन शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है। महत्वाकांक्षी, घमंडी और रिस्क टेकर।


टू बी कॉन्टिनुएड .....

तुलसी की औषधीय गुण ........

भारत में पांच में से कम से कम एक घर में आसानी से तुलसी का पौधा पाया जाता है, क्योंकि हिन्दू धर्म में यह एक पूजनीय पौधा है। परन्तु पूजा के अलावा तुलसी के पत्तों में काफी सारे औषधीय गुण है, जिसकी चर्चा हम यहां करने जा रहे हैं।

क्या आप जानते हैं कि तुलसी का पौधा काफी तेजी से उग जाता है, लेकिन कभी पेड़ नहीं बनता। अमूमन इसकी ऊंचाई 3-4 फीट ही रहती है। लेकिन इतना छोटा सा यह पौधा हमें बड़ी-बड़ी बीमारियों से बचाता है, जैसे कि किडनी के रोग से बचाव, दिल की बीमारी से बचाव, और भी कई सारे रोगों की एक दवा है ‘तुलसी’।

किडनी की पथरी
लेकिन इसे भिन्न-भिन्न रोगों का इलाज करने के लिए कैसे इस्तेमाल करना है, यह जान लीजिए। यदि किसी को किडनी की पथरी है, तो वह तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित रूप से 1 माह तक पीए, उसे आराम मिलना आरंभ हो जाएगा। इसके प्रयोग से अपने आप ही कुछ समय के बाद पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है।

दिल की बीमारी
तुलसी की पत्तियां खून में बन रहे कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती हैं, इसलिए यह हृदय रोग से ग्रसित मरीजों के लिए वरदान साबित होती हैं। जिन्हें दिल की बीमारी हुई हो, उन्हें तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। केवल तुलसी के अलावा यदि इसके साथ हल्दी भी मिलाकर पानी पीया जाए तो अधिक लाभकारी होता है।

यदि संक्रमण हो तो
लेकिन जिन्हें रोग है केवल उनके लिए ही क्यों, किसी ही आम व्यक्ति के लिए तुलसी का रोज़ाना सेवन करना फायदेमंद है। उदाहरण के लिए, यदि फेस पर किसी तरह का कोई संक्रमण बन रहा है या त्वचा के निखार के लिए भी तुलसी के पानी का इस्तेमाल किया जाता है।

चमकदार त्वचा के लिए
आप कुछ घंटों के लिए गुनगुने पानी में तुलसी के पत्ते डालकर रख दें, बाद में इससे मुंह धो लें। रोज़ाना यह 2-3 बार करेंगे तो आपको अपनी त्वचा में एक चमकदार फर्क महसूस होगा।

थकान को करे दूर
अब हम आपको तुलसी का एक ऐसा फायदा बताने जा रहे हैं, जिसे जानने के बाद आप जरूर इसका इस्तेमाल आरंभ कर देंगे। विशेषज्ञों के अनुसार तुलसी के इस्तेमाल से थकान दूर होती है। अब थकान तो आजकल हर दूसरे व्यक्ति को महसूस होती है, तो फिर सोच क्या रहे हैं।

रोज़ाना करें इस्तेमाल
रोज़ाना तुलसी के पानी का सेवन करें या फिर केवल इसे चाय में डालकर भी पी सकते हैं। इससे चाय तो स्वादिष्ट लगती ही है, साथ ही तुलसी की पत्तियां शरीर से सारी थकान छू-मंतर कर देती हैं। 

Tuesday, October 20, 2015

नवरात्रि - गायत्री देवी



ओम शांति
नवरात्रि के इस अष्टमी पर आप सबका स्वगत है आज हम शक्ती स्वरूपा माँ गायत्री देवी के शक्ती स्वरुप का अनुभव करेंगे गायत्री देवी को वैसे विशाद में डूबे हुए मनुष्य आत्मायों के दुःख दूर करने वाली कहते है सबके मन को हर्षाने वाली ख़ुशी का वरदान देने वाली और आनंद मगन करने वाली भी कहते है
हम सब आज आनंद मगन होकर ख़ुशी से इस रूहानी यात्रा पर चलेंगे ...... 
हम अपनी आत्मा के अदभुत रह्श्य को जानते हुवे आत्मा अनुभूति का आनंद उठाएंगे .... आत्मा एक तिकी रोकेट है आत्मा एक यात्री है तो चलिए मन बुद्धि के द्वरा अपनी यात्रा शुरू करे .....संसार से वियोग होकर परमधाम से अपना योग जोड़े ....
    अपने आपको साक्षी होकर देखे और इस शरीर को मन्दिर समझ आत्मा को एक दैवी शक्ति के रूप में देखे शरीर जड है और आत्मा चेतन है इसलिये चेतना को शक्ती कहा गया है शक्ती का ही पूजन गायन होता है इस आवाज़ की दुनिया से दूर सूर्य चाँद सितारों से पार ..... पांच तत्वो से पार
शुक्ष्म लोक में मै आत्मा आ गयी हूँ जहा चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश है जहा सिर्फ भावनाए कार्य करती है .....वो भी इस संगम समय पर यहाँ मै आत्मा अपने बापदादा से रूह रिहन करते हुवे अतीन्द्रिय सुख का अनुभव कर रही हूँ बाबा की प्यार भरी दृष्टी मुझ आत्मा पर पड़ रही है .....

में आत्मा परमधाम निवासी हूँ पर वाया  शुक्ष्म लोक से होकर शक्ती भर कर अपने परमधाम की ओर उड़ान भर रही हूँ .......
अब मै आत्मा अपने मुलवतन शांतिधाम  परमधाम मै पहुंच गई हु मै अपने पिता परमात्मा से मिलन मना रही हूँ यह मिलन मुझ आत्मा को
पावन और सर्व शक्तियों से भरपूर कर रही  है ......( कुछ पल इस अवस्था में खो जाईये .)
धीरे धीरे मै आत्मा शांति की शक्ती से भरपूर होकर शुक्ष्म लोक में आ गयी हूँ  और बापदादा से मीठी मीठी बाते हो रही है और बाबा आज फिर मुझे एक नया दृश्य दिखा रहे है और मै उस दृश्य को देखने लगी जहा मनुष्य आत्माए विशाद में डुबी है बहुत गम में है उनकी ख़ुशी गायब है ......
  ऐसा दृश्य देखकर मुझ आत्मा को कल्प पहले वाली श्रेठ शक्ति रूप माँ गयात्री की याद आ गई और भक्तो की पुकार सुनाई देने लगी .......
अब मै आत्मा बाबा से मिलकर उनसे शक्ति लेकर माँ गायत्री के शक्ति रूप को धारण कर विश्व सेवा करने लगी ..... 
परम धाम से गुलाबी रंग की किरने आ रही है और मुझ आत्मा से होते हुए संसार की अनेक आत्माओं को स्पर्श कर रही है (इस दृश्य में खो जाइये ) परम धाम से गुलाबी रंग की किरने आ रही है और मुझ आत्मा से होते हुए संसार की अनेक आत्माओं को स्पर्श कर रही है
धीरे धीरे .... विशाद में डुबी आत्माये दुःख से दूर हो रहे है गम में डुबी आत्माए ख़ुशी का अनुभव करने लगी है ......
और मै आत्मा शक्ती स्वरुप का अनुभव करते हुवे बाबा से विदाई लेते हुवे नीचे की ओर आने लगी ....

मुझ आत्मा को अपनी शक्तियों का एहसास हुवा में आत्मा अपने शक्ती से खुद को और संसार को बदल सकती हूँ .... आज में संकल्प करती हूँ आत्मा स्मृति से हर कार्य करुँगी अपने लोकिक और अलोकिक परिवार का बैलेंस करते हुवे जीवन व्यतीत करुँगी....
अपना तन मन धन सफल कर भविष २१ जन्म की कमाई जमा करुँगी ...
 ओम शांति शांति शांति .....



Friday, October 16, 2015

महाकाली शक्ती स्वरूप का अभ्यास



ओम शांति

नवरात्री के इस पावन दिवस पर आप सब का स्वागत है, आइये आज फिर से हम अपनी आत्मा की शक्ती को जाने पहचाने और आनुभव करे
आज हम महाकाली शक्ती स्वरूप का अभ्यास करे  महाकाली को असुर सस्कारो को मिटनेवाली कहते है ,जब धरती पर बहुत पाप और   बड़ते असुरी सस्कर अपनी  चरम सीमा पर होते तब परमात्मा शिव से शक्ती लेकर माँ काली ने पुरे संसार को असुरी संस्कारो से मुक्त कर दिया थी अब फिर से वही समय चल रहा है तो आइये इस रूहानी यात्रा पर ......

अपने को इस संसार से अलग चेतन आत्मा अनुभव करे ,परम शक्ती से मिलन मनाने की लिए परमधाम की और उड़ान भरे ,इस आवाज की दुनया से दूर ..सूरज चांद सितारों से ...सूक्ष्म वतन आप आत्मा आकरी रूप में पहुँच गये है ....और वतन में बाप दादा आपका स्वगत कर रहे है बापदादा को देख आप हर्षित हो रहे है आप ख़ुशी खुशी बाप दादा के साथ मिलकर सुस्म वतन का आवलोकन कर रहे है इस अलोकिक यात्रा बाद आप और उडान भर रहे है ...
अब मै आत्मा परमधाम शांतिधाम में पहुँच गयी हूँ .... मेरी आत्मा परम शांति का अनुभव कर रही है और यही मेरा सच्चा घर है ... यही से मै आत्मा पाठ बजाने संसार में आती हूँ ... अब मुझ आत्मा का महा मिलन हो रहा है अपने पिता परमात्मा से  मेरे पिता परमात्मा सर्व शक्तिमान है उन से सर्व शक्तिया मुझे मिल रही है  में आत्मा परम शक्ती से भरपूर हो रही हूँ....
( कुछ पल इसी अवस्था में खो जाईये ... )

अब आप आत्मा शिव शक्ती स्वरूपा बन गयी है और अपने संकल्प शक्ती के द्वारा आप शुक्ष्म लोक में आ रही है . जहा आप बापदादा से मुलाकात कर रहे है .. उन से मीटी मिटी रूह रिहान कर रहे है ..और इसी बीच बाबा आपको सन्सार की वर्तमान समय से अवगत करा रहे है ..जहा मनुष्य आत्माये असुरी संस्कारो के वशीभूत हो पाप कर्म कर रहे है.. जिस के वजह से सारी दुनिया पतित, दू खी और अशांति हो गयी है ... इस दृश को देखते ही मुझ आत्मा को कल्प पहले वाली श्रेष्ठ स्मृति शिव शक्ती स्वरूपा माँ काली की याद आ गयी...
(गीत---)
और मै आत्मा अपनी श्रेष्ठ स्वमान से शिव बाबा से मिलकर विश्व कल्याण के कार्य में सहयोगी बनी और मै आत्मा शिव शक्ती माँ काली बन गयी... ( म्यूजिक )
परमधाम से सफ़ेद चमकीली रंग की किरणे निकल रही है और मुझ आत्मा से होकर पुरे संसार में पहुँच रहे है .... धीरे धीरे परमधाम से शक्तियों की किरणे आ रही है और आप आत्मा से होते हुवे पुरे संसार में फ़ैल रहे है ... (इस दृश में खो जाईये )

अब संसार की सभी आत्माए असुरी संस्कारो से मुक्त हो गयी है चारो ओर शांति फ़ैल गयी है और एक नया सबेरा होने को है... जहा सभी आत्माए सुख शांति और समृद्दी का जीवन अनुभव करेंगे...

और मै आत्मा अपने श्रेष्ठ स्मृति से शिव शक्ती माँ काली की इस स्वमान को याद करते हुवे नीचे की ओर आ रही हूँ ... शक्ती स्वरुप का अनुभव मेरे मन बुद्धि को शुद्ध और पवित्र बना दिया है ..
और आज से मेरे मन बुद्धि और संस्कार आत्मा  स्मृति से ही कर्म करेंगे जिस से मै आत्मा श्रेष्ठ कर्म का भाग्य जमा करुँगी ... मेरे कर्म ही मेरे पहचन है ... सर्व के प्रति शुभ भाव शुभ कमाना करना ये आत्मा की संस्कार है येही सच्चा धर्म है..   ओम शांति शांति शांति...